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Wednesday, December 26, 2007

एक भावुक पोस्ट

साथियों एक पोस्ट की कॉपी यहां डाल रहा हूँ। ये वो पोस्ट है जो उन दिनों (सितम्बर 2007) कई ब्लॉगस् पर डाली गयी। जब जामिया पुलिस चौकी पर हुये हमले के दौरान उपद्रवीयों ने मुझे भी अपना निशाना बनाया था। इस घटना के दौरान मैं घायल हो गया था। और मुझे एक हफ्ता बैड़ पर रहना पड़ा था। ये पोस्ट मेरे छोटे भाई समान नसीम अहमद ने लिखी थी। जो इस वक्त आगरा मे एनडीटीवी के संवाददाता है। इस पोस्ट को जब मैने पहली बार पढा था तो मेरी आँखे भर आयी थी। ये पोस्ट सभी साथियों के लिये एक बार फिर....... आपकी प्रतिक्रिया का इन्तज़ार रहेगा। परवेज़ सागर दोस्तों मेरा नाम नसीम अहमद है। मै आगरा की पत्रकारिता मे करीब दस सालों से सक्रीय हुँ। पहले मैं कई साल प्रिन्ट मे रहा और उसके बाद अब एक हिन्दी न्यूज़ चैनल के साथ काम कर रहा हुँ। मै रंगकर्मी को नियमित पढता रहा। फिर ख्याल आया कि मै भी कुछ लिखुँ। तो आज एक ऐसे व्यक्ति के बारे मे बताना चाहता हुँ जो शुरु से अपनी खबरों के कारण चर्चाओं मे रहे कई लोगों को टीवी पत्रकारिता के गुण सिखाऐ। पर किसी से कोई उम्मीद कभी नही रखी। वो है मेरे बड़े भाई समान परवेज़ सागर जो पिछले कई सालों से आज तक के साथ काम रहे है। वही थे जो मुझे प्रिन्ट से टीवी की तरफ ले आये। उन पर पत्रकारिता का जो जुनून मैने देखा वही मेरे लिये भी प्रेरणा बना। उन्होने तीन साल आगरा मण्ड़ल मे आज तक का परचम लहराया। कई ऐसी खबरें की जो हम सोचते भी नही थे। पार्टी विशेष की सरकार मे लखनऊ विकास प्रधिकरण घोटाले का खुलासा करने के बाद भले ही धीरेन्द्र जी दिल्ली चले गये हो पर परवेज़ सागर ने यहीं रह कर परेशानियों को सामना किया। उन पर तीन बार जान लेवा हमला किया गया। लेकिन उन्होने अपने काम के साथ कभी समझोता नही किया। बात ज़्यादा बढी तो आज तक ने उन्हे अगस्त 2006 मे दिल्ली बुला लिया। वहां भी उन्होने अपनी खबरो के दम पर एक नया मुकाम हासिल किया। ज़हरीली सब्ज़ीयों का खुलासा कर राजधानी मे सनसनी फैला दी। इस खबर के लिये उन्हे ईएम बैस्ट रिर्पोटर अवार्ड से नवाज़ा गया। और बीते शनिवार की शाम एक बार फिर परवेज़ सागर का नाम चर्चओं मे आ गया जब जामिया इलाके की पुलिस चौकी पर आतंक का नंगा नाच खेला जा रहा था। उस वक्त परवेज़ सागर वहां पंहुचने वाले पहले पत्रकार थे। वो अपना काम अन्जाम दे रहे थे अकेले निड़र। उन्होने अपनी जान की परवाह किये बगैर अराजकता के खेल की सारी कवरेज की लेकिन इसी दौरान आगजनी करने वाले उपद्रवीयों ने उन्हे अपना निशाना बनाया। उनका कैमरा आई डी वगैरह सब लूट लिया गया। उन्हे बेरहमी के साथ पिटा गया। वो किसी तरह से जान बचाकर वहां से निकले। परवेज़ जी को पेट मे गम्भीर चोट आयी है। फिलहाल वो छुट्टी पर चले गये है। एक बार फिर उन्होने अपनी जान दांव पर लगाई। इस तरह के लोग पत्रकारिता मे भले ही आज कम हो लेकिन वो पत्रकारिता के क्षेत्र मे कदम रखने वालों के लिये मिसाल साबित होते है। उनके मार्ग निर्देशन मे कई साल काम किया इस लिये उनके बारे मे लिखना ज़रुरी समझा। ईश्वर से प्रार्थना है कि वो जल्द स्वस्थ होकर अपने काम पर वापस लौटें। नसीम अहमद, आगरा

4 comments:

satyandra yadav said...

kisi writer ne thik hi likha hai ki ' laharo se dar kar nauka par nahi hoti , koshish karne walon ki har nahi hoti' yah pankti sayad parvez sir ne padh liya tha aur puri lagan se har mushibat ko sah kar aaj apana ek alag mukam banayen hain..... patrakarita ki rah katon bhari hai... isme samaj ka kai roop dekhane ko milte hain....

mai abhi study kar raha hoon aap log ka sangharsh dekhar mujhe sahas milta hai ... ... aaplog pure man se apna dharm ka palan kijiye bhagwan aapke sath hai...

tulika singh said...

sir apaka ye post padh kar sabse pahel dimag mai ek hi baat aayi ki bahut kum patrkar hote hai jinhe ye mouka milta hai . khud ko ko bhul ek patrkar ki jindgai jien ka ye lamha kafi kum hi logo ko milta hai . wais ebhi hume aapse kafi kuch sikhen milta rahta hai . aur aub apek experience bhi padhne ko mil rahe hai .

shuklapurnendu said...

parvez sir
when i met first time with you i felt that you are sensitive person.and sensitiveness is most important thing for good humanbeing.but today when i read this post i felt you are courageous.and its most important thing for a real journalist which is rare in todays journalism.so rangkarmi is in safe hands who is sensitive and courageous.means its equally for theatre artist and journalist.
purnendu
c voter

shashisinghal said...

parvezji , mene ak bhavuk post ko padha to pata chala ki aap agra main patrakarita kar chuke hain aur ab dilli main hai . main bhi agra ki hoon aur mene 1991 main swarajya times akhbar main kam kaya hai.apka rangkarmi blog dekha ,achha laga. mene bhi apna blog banaya liya hai kintu blog par kase kam karte hain samajh nahi aa raha hai.
aap par hua hamle ne mujhe aahat kiya ,kintu bhagwan se prarthna hai ki aap apni har manjil ko aasani se par karen.

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