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Tuesday, December 4, 2007

नारी शक्ति

औरत कोमल है ,कमज़ोर नहीं, तुम इस पर जुल्म न करना। औरों की खातिर होता है , इसका जीना औऱ मरना । इसको अबला तुम मत समझो, क्या पता बला कब बन जाएं । जिन आंखो से चाहत बरसे , वह कयामत बरसायें। ये अपनी पहचान है खुद, तुम इस पर वार न करना । औरों की खातिर होता है, इसका जीना और मरना। ये ममता की एक मुरत है , हैं प्यार जंहा रहती है वहीं। एक जन्नत और है दुनियां में , जो मर्द के पहलू में है नहीं। इसके ही हाथों होता है, हर एक राह संवारना। औरो की खातिर होता हैं, इसका जीना और मरना। तुलिका सिंह सीएनइबी

8 comments:

Keerti Vaidya said...

bhut he payari rachna hai..

आशीष महर्षि said...

good one

garya said...
This comment has been removed by the author.
garya said...

hi tuli !

garima here. ur aradhana's roommate. just gonna thru ur poem on NAARI. really gd one . do keep writing.
lookin forward to read from u more.
take care & enjoy.

satish said...

hi.....tuli
bhut badiya, payari vuchar hai

DR.MUKESH RAGHAV said...

what a sentimental poetary worth praising .Full Marks to the writter.
Dr. Mukesh Raghav

DR.MUKESH RAGHAV said...

what a sentimental poetary worth praising .Full Marks to the writter.
Dr. Mukesh Raghav

jayanti jain said...

great

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