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Tuesday, January 22, 2008

अच्छा होता

बरसती शाम में आ पाते तो अच्छा होता और कोई गीत सुना जाते तो अच्छा होता महीनों बाद तो आया है खुशनुमा मौसम साथ में तुम भी अगर आते तो अच्छा होता मेरी चुनरी इन हवाओं में उडी जाती है इसको दोबारा ओढा जाते तो अच्छा होता सपनों में आओगे इस ख्याल में नींदें खोई अब हकीकत में चले आते तो अच्छा होता बैठ कर सुलझाई थी तुमनें कभी लट मेरी उलझी है आज भी, सुलझाते तो अच्छा होता चाहे आकर के भी जाने की रट लगा लेना इक दफा आ के चले जाते तो अच्छा होता मैं तो इक पल की मुहब्बत में काट लूं ये हयात मुश्किल अगर तुम इसे पाते तो ये अच्छा होता

7 comments:

Parvez Sagar said...

रंगकर्मी परिवार मे आपका स्वागत है। आपकी कविता मे जो सबसे अछ्छी बात है वो है आम आदमी की भाषा.... जो इसे पाठकों के लिये सरल बनाती हैं। और यही आपकी सफलता है....... हमें यकीन है कि आप इसी तरह से रंगकर्मी पर अपने शब्दों का ताना-बाना बुनती रहेंगी.. शुभकामनाओं सहित......

परवेज़ सागर

pramod kumar kush ' tanha ' said...

महीनों बाद तो आया है खुशनुमा मौसम
साथ में तुम भी अगर आते तो अच्छा होता

मेरी चुनरी इन हवाओं में उडी जाती है
इसको दोबारा ओढा जाते तो अच्छा होता

achchi ghazal hai. bahr ka thoda dhyaan rakhtay toh aur achcha ho sakta tha . baharhaal mubaarak ho.
- p k kush 'tanha'

mehek said...

aashaji bahut khub,tumhi jitkya chan marathi kavita lihita ,tevadyach chan gazal sudhha.
andheron mein ghire hai palko ke saye
khwabh roushan karao tho achha hota

प्रभाकर पाण्डेय said...

दिल को छू जानेवाली रचना। कमाल का लिखा है आपने।

Keerti Vaidya said...

ati sunder kavita.....

Amit said...

अच्छी कविता है। पढ़कर मन खुश हो गया।

धन्यवाद...

satyandra said...

appki kabit us pal ko byan kar rhi hai .. jab koi do chahne wale dur hote hai ... aapki kabita ek ajab si romanch paida kar di hai... aap mere dil ki bat likh di hai...

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