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Thursday, November 20, 2008

"कभी कभी"

"कभी कभी"
दिल मे बेकली हो जो, " कभी कभी" क्यूँ शै बेजार लगे हमे सभी कोई तम्मना भी न बहला सकी, क्यूँ हर शाम गुनाहगार लगे" कभी कभी..........."

2 comments:

Bandmru said...

kya baat hai......
कोई तम्मना भी न बहला सकी,
क्यूँ हर शाम गुनाहगार लगे"
कभी कभी..........."

नारदमुनि said...

evening is liye gunahgar lagti hai kyonki ham morning ka aanand nahi le pate. narayan narayan

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