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Wednesday, November 12, 2008

"सजाएं"

"सजाएं"
इस खामोशी मे भी हरदम तुमसे बातें होतीं हैं , दूर जुदा रह कर भी ख्यालों मे मुलाकातें होती हैं.... हमको वफा का इनाम दिया , जी भर के इल्जाम दिया , तुमने हमको भुला दिया ये सोच के ऑंखें रोती हैं....
क्या खोया क्या पाया था जीवन युहीं गवांया था , तुमने भी ठुकराया है अब खोने को सांसें होती हैं.....
एक बोझ मगर सीने मे है , कौन सा ऐसा जुर्म हुआ , चाहत मे मर मिटने की क्या खोफ-जदा "सजाएं" होतीं हैं

8 comments:

sandhyagupta said...

Bhavparak.

guptasandhya.blogspot.com

makrand said...

एक बोझ मगर सीने मे है , कौन सा ऐसा जुर्म हुआ ,
चाहत मे मर मिटने की क्या खोफ-जदा "सजाएं" होतीं हैं
great lines again
regards
i just purchesed the bull because sensex is turning bearish

rajiv maheshwari said...

काफी अच्छा लिख लेती है. आगे भी पड़ने को मेलेगा

परमजीत बाली said...

इस खामोशी मे भी हरदम तुमसे बातें होतीं हैं ,
दूर जुदा रह कर भी ख्यालों मे मुलाकातें होती हैं...

बहुत बढिया!सुन्दर रचना है।

नारदमुनि said...

kisi se juda hona ek aisi saja hoti hai jo zindgi bhar chupchap katani padti hai, koi sunwai nahi. narayan narayan

seema gupta said...

" aap sbhee ke preceious comments ka bhut bhut shukriya"

Regards

raj said...

एक बार फिर बहुत अच्छी रचना पढ़ने को मिली। धन्यवाद।

नारदमुनि said...

jurm koi kiya ho to batayega koi.bahut khub likhatin hain aap
narayan narayan

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