रंगकर्मी परिवार मे आपका स्वागत है। सदस्यता और राय के लिये हमें मेल करें- humrangkarmi@gmail.com

Website templates

Monday, December 31, 2007

नए साल की हार्दिक शुभकामनाएं .....

मैं अपने पत्रकार बन्धुओं को नए साल के आगमन पर हार्दिक शुभकामनाओं के साथ उज्जवल भविष्य की कामना करता हूँ । २००७ विदा हुआ ,कामना है नया साल आप सभी के लिए अमन , चैन , खुशियों से भरा हो । गुजरे पन्ने को पलट कर देख लें ... उनसे कुछ सिख लें....... ईश्वर आपके साथ है । सत्येन्द्र यादव

वर्ष 2008 की शुभकामनायें


सभी पत्रकार भाईयो एवं रंगकर्मी के समस्‍त सदस्यों , परवेंज भाई को सपरिवार को आंग्ल नव वर्ष 2008 की प्रथम सुबह पर हजारों हजार शुभकामनायें

शशिकान्‍त अवस्‍थी
कानपुर ।

नया साल, नयी उम्मीदें... शुभकामनाएं

साथियों, साल 2007 मे ही रंगकर्मी की शुरुआत हुई। और खुशी की बात है कि हमारे इस परिवार मे हर रोज़ कई नये लोग जुड़ रहे हैं। हमें हर दिन रंगकर्मी की सदस्यता के इच्छुक लोगों की मेल्स आ रही हैं। रंगकर्मी के प्रति लोगों मे बढता क्रेज़ आप सभी साथियों की बदौलत है। देश ही नही विदेशों मे रह रहे हिन्दी भाषी लोग भी हमारे साथ जुड़ रहे हैं। कई साथियों ने बड़े ही शानदार तरीके से अपनी आमद दर्ज कराई है जिनका अन्दाज़ सभी को पसन्द आया। मुझे उम्मीद ही नही पूरा विश्वास है कि साल 2008 रंगकर्मी के लिये खास होगा। और हमारे सभी साथी अपनी लेखनी के ज़रीये रंगकर्मी के इस सफर को आगे बढाते रहेगें। मेरा निवेदन है उन लोगों से जो रंगकर्मी के सदस्य बनना चाहतें हैं कि वो हमें मेल करते समय अपने परिचय के साथ-साथ अपना पता और फोन नम्बर भी ज़रुर लिखें।
आप सभी साथियों के अभिवादन के साथ........... नये साल 2008 की हार्दिक शुभकामनाऐं। ईश्वर से प्रार्थना है कि नया साल आप
सभी के लिये ढेरों सफलताऐं और खुशियां लेकर आये........



आपका..........


परवेज़ सागर
www.rangkarmi.blogspot.com
www.parvezsagar.blogspot.com

Sunday, December 30, 2007

नव वर्ष की हार्दिक हार्दिक शुभकामनाऐं.

मित्रों एक और नया वर्ष, एक और नय़ा साल संघर्षों का, एक और नय़ा साल उम्मीदों का, एक और नय़ा साल नई सोच बनाने का। इस नये साल में आगाज़ है,क्रांति का आगाज़ है,स्वाभिमान का आगाज़ है,चेतना का आगाज़ है,विश्वास का आगाज़ है,सत्य का आगाज़ है,अनवरत संघर्ष का आगाज़ है उस इंकलाब का, जो ऐसे भारत का नव निर्माण करेगा जिसमें योग्यता पैमाना होगी, संवेदनाओं भावनाओं का निस्वार्थ समर्पण होगा, राष्ट्र के जातिहीन,अधर्म ऱहित, विकास के लिए । और क्रांति की, बागडोर होगी, नवयुग के नव निर्माता, जातिहीन,स्वार्थ हीन द्वेष ऱहित, छात्रों के हाथ और नारा होगा इंकलाब । इस आगाज़ के साथ एक नये समाज की कल्पना संजोते हुए, अपनी एक और गज़ल को, अपने आदर्श दुष्यंत कुमार जी त्यागी को, आज उनकी पुण्यतिथि पर समर्पित करते हुए आप सभी को एक बार फिर से नव वर्ष की हार्दिक हार्दिक शुभकामनाऐं । भाई मैं चाहता हूं आदमी कुछ इस कदर बदले, दर्द हो मंदिर में आंसू मस्जिद से निकले । बहुत कह चुके,अब बंद भी करो,हम एक दूसरे के बारे में, अब जब भी निकले मुँह से हमारे प्रेम के बोल निकलें । पहले कभी वो तेरी ईद,अपनी दिवाली की तरह मनाता था, कुछ कर ऐसा,उसकी हर दिवाली तेरी बारावफात सी निकले । उसकी हर आह पे तुझे भी होता था दर्द कभी, ला ऐसा वक्त उसकी गोदी में तेरा दम निकले । इतजा़र में हूँ उस वक्त के जब प्रेम और अमन की हवा बहेगी, तेरा और मेरा खुदा एक है हर तरफ यही आवाज़ निकले । बहुत खून की नदियाँ बहा ली,एक दूसरे की,अब दुआ करो, तेरे मुहब्बत के काबा से मेरे प्रेम की गंगा निकले । हमारे बीच कभी कितना प्रेम हुआ करता था,करें हम नई कोशिश, ये नया साल हमारी दोस्ती की नयी मिसाल बनकर निकले । आपका अनुराग अमिताभ

बड़ी मुश्किल से जीवन में मिलते है सच्चे दोस्त

सच है कि जिसके जीवन में कोई सच्चा मित्र नहीं वह बदकिस्मत हैं।यों तो हर व्यकित को अपने जीवन की लड़ाई अकेले लड़नी पड़ती हैं। मगर कोई सच्चा दोस्त साथ हो तो कोई भी संघर्ष आसान हो जाता हैं । अकेले होने का अहसास नहीं खटकता न ही निराशा घेरती हैं। हालिया सर्वे में एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया हैं कि जिनके दोस्त नहीं होते वे अवसाद के शिकार हो जाते हैं। यहॉ तक कि ऐसे लोग हृदय संबंधी बीमारीयों की चपेट में आकर हर साल मौत के मुँह में चले जाते हैं। मनोंवैज्ञानिकों का भी मानना है कि जीवन में एक दोस्त का होना ज़रूरी है। परिवार, पत्नी और बच्चे होने के बावजूद एक ऐसा दोस्त का होना अपने दुख-सुख कह सके। कोई पीड़ा सता रही हो उसे अपने दोस्त से कहकर मन का बोझ को हल्का किया जा सकता हैं। वैसे भी सच्चे मित्र की पहचान संकट के समय ही होती हैं ।तुलसीदास ने ठीक कहा है कि-आपत काल परखिए चारि, धर्म धीरज, मित्र अरि नारि । शेष अगले अंक में रजनीश अग्रवाल

Ek hindustani

Saturday, December 30, 2007 Ek Hindustani Is kudrat ke zarre-zarre me kuch aisa chhipa hota hai jo kabhi-kabhi humare liye akalpaniya hota hai,Insaan bhi unme se ek hai jisme atulniya pratibha samahit hai.Nishchit hi lekhan usme se ek hai.....Shabd aapko apna shagird bhi bana sakte hain to jung bhi kara sakne me mahir hote hain.maine bhi aaj se ek rangkarmi hone ke naate shabdo ke jaal se kuch nayaab shado ko chunkar ek ladi bunne ki koshish ki hai aur koshish karungi ki is ladi ki dor ko itna mazbut bana du ki har hindustani usme apni pratichhaya ko mehsus kar sake kyuki insaan ki ye indriya hi sabse mazboot hai ki wo ek- dusre ke bhawo ka sparsh tezi se karta hai.Ek hindustani hone ke nate ,Ek samvedansheel insaan hone ke nate,mujhe vishwas hai ki in shabdo me aap khud ko talashne ki koshish zarur karengeRangkarmi ki amulya nidhi.......... SMRITI DUBEY,

Saturday, December 29, 2007

शायर की बीवी

दोस्तों, चाहते हुए भी पिछले कुछ दिनों से ब्लॉग पर लिख नहीं पाया। हां, आपके पोस्ट्स को पढ़ता ज़रूर रहा हूं। कल मैंने जाने-माने शायर आदिल लखनवी साहब की एक रचना पढ़ी। मुझे लगा आपको भी पढ़ना चाहिए। व्यंग्य को ज़रिए संजीदा मसलों को उजागर करने में आदिल लखनवी साहब का कोई सानी नहीं। आप भी देखिए एक शायर की बीवी की व्यथा ---- शायर की बीवी बहन मैं सोचती हूं ज़िंदगी वो कितनी अच्छी थी जब अपनी उम्र की हांडी न पक्की थी न कच्ची थी न हाय हत्या कुछ थी न कोई छी छी थी मोहल्ले में जिधर जी चाहता था आती जाती थी जवानी ने मगर आते ही ऐसा राग फैलाया के मुझको देख कर ठिठका कोई और कोई बौलाया किसी के लब पे आया मेरा नाम आहिस्ता आहिस्ता कोई करने लगा मुझको सलाम आहिस्ता आहिस्ता कोई कहता था मेरी चाल को परियों का फेरा है कोई कहता था मेरी ज़ुल्फ़ का बादल घनेरा है किसी के लब पे आहें थीं किसी के लब पे नाले थे के मेरे चाहने वाले बहुत से गोरे काले थे मेरे ये सारे आशिक़ कितने बांके और सजीले थे सफ़ेद और सुर्ख़ थे उनमें कुछ उनमें नीले पीले थे बड़े बूढ़े मगर जिस वक्त मुझको देख लेते थे बड़ी संजीदगी से अपनी आंखें सेंक लेते थे मेरे मां बाप ने मेरे लिये जब ग़ौर फ़रमाया ख़ुदा की मार हो उनको मुआ शायर पसंद आया घटाओं पर मेरे बालों के बस मरता है ये शायर कभी एक बाल्टी पानी नहीं भरता है ये शायर शफ़क़ कहता है बालों को जो लब को फूल कहता है वो घूरे के किनारे फ़ूंस के छप्पर में रहता है लंगोटी बांधता है जो ग़रारा क्या पहनाएगा लंगोटी भी कभी ठर्रे की ख़ातिर बेच आएगा निरा शायर है बहना बेअमल है और निकम्मा है मेरी गोदी नहीं भरती है ये भी एक मोअम्मा है हज़ारों बार टोका लाख समझाया नहीं माना अरे हद है संखिया खाने से धमकाया नहीं माना कभी जब सोचती हूं तो तबीयत ऊब जाती है के अब मेरी समझ में बस यही एक बात आती है कहां तक साथ आख़िर इस निखट्टू का निभाउंगी किसी दिन छोटे देवर को मैं ले के भाग जाउंगी शफ़क़- रात , मोअम्मा - रहस्य, संखिया - ज़हर

आँखे बन्द कर लेने से नज़ारे नही बदलते...

अनुराग ने रंगकर्मी पर अपनी पोस्ट "जंग लगी जम्हूरियत" ड़ालने के बाद मुझसे ऑन लाइन पूछा सर मेरे आक्रोश पर आपने कुछ लिखा नही। मैने अनुराग से कहा ये तुम्हारा आक्रोश नही भाई ये तो वो हकीकत है। जो सबके सामने है लेकिन अफसोस कि उसे कोई देखना नही चाहता। अनुराग ने अपनी रचना के ज़रीये एक ऐसी सच्चाई को शब्दों मे ढाल दिया जिससे हम सभी हरदम जो-चार होते है। जम्हूरियत का मतलब सिर्फ कहने या लिखने से ही नही बल्कि सामाजिकतौर दिखाई देना चाहिये। लेकिन हकीकत मे ऐसा नही है। अगर सपनों की दुनिया से बाहर आकर देखें तो अनुराग की रचना हकीकत की शक्ल मे आपके सामने खड़ी नज़र आती है। ज़रुरत इस बात की है कि अनुराग की तरह ही हम सभी को इस बारे मे सोचना होगा। नही तो जंग लगी ये जम्हूरियत इस हाल से भी बदतर हो जायेगी। हमारे साथी अनुराग को बधाई इस पोस्ट के लिये। सभी साथियों से उम्मीद है कि वो सब अपनी लेखनी के दम पर सच को उजागर करते रहेगें। क्योंकि आँखे बदं कर लेने से नज़ारे नही बदलते............

परवेज़ सागर

Benazir, Benazir & Benazir........

I am not her relative, not her friend, never interviewed her, never met her, never talked to her! Then why I am writing about her. I myself don't know. I was little sad when the news broke of her assasination. I don't know why. I was glued to a TV set, talking to my friends about the news but no one seemed to be interested. They said it was nothing new in Pakistan. Sooner or later It had to happen. But why Benazir, why not someone else? As far I am concerned It was a black day for the entire region but more for our neighbour. They lost a charismatic leader. But why I am concerned! Why I was not able to sleep whole night? I did'nt had my breakfast the next morning. I was feeling low. Why? As i said I had no relation with the departed soul. After introspecting for almost two days I sat to write down. As the title says Benazir,Benazir & Benazir......... meaning beautiful. She was beautiful, charismatic leader with mass appeal, well educated. And most Important she was almost on the verge of becoming Prime Minister Of Pakistan. But again why I am disturbed? Am I disturbed for Pakistan. May be Yes. Yes........... Yeas I got it right........ Its for pakistan. I am sad for Pakistan. SHHHHSSSSSS. If someone hear this will brand me as a traitor. Right! No not in todays scenario. Things have changed in past few years. Both the countries are looking to each other as strategic partners. But this untimely demise of Mrs. Bhutto will change something. It will change pakistan. In fact It has changed Pakistan. Mush......... Please listen. Death of Mrs Bhutto will change Pakistan. I cannot say how right now....... But Still I am sad...........This post is incomplete. Will get back as soon as i gather my words.

Friday, December 28, 2007

जंग लगी जम्हूरियत

घर नया खरीदा है, रोशनी नहीं हैं यारों, वतन हो चुका आजाद, हर शख्स यहाँ लुटेरा है यारों। बदनसीबी, गरीबी से शिकस्त होती है हर बार, गरीब हो तुम गरीबी में ही रहो यारों । कल सुना है की पटरी पर कोई शख्स कटा है, दुनियावी जहमतों से वो आजाद हो गया यारों । इन इंसानों की निगाहों में कुछ कमीनापन सा दिखता है, घर में बहन बेटी हो तो सम्हालों यारों । हिंद को बदलनें की बात कर रहे थे जो हरामखोर, विदेशी सरज़मीं पर घर खरीद लिया है यारों । परदा किये हुए अपनी माँ को देखा है हर बार, सड़ चुकी जो परम्पराऐं, बदलो नया वक्त है यारों । नलों में पानी, खंबों में बिजली, पेट मे खाना नहीं, सटीक देश है, गुजारिश है, जहां मिले नेता, सालों को पटक पटक के मारो यारों । अनुराग अमिताभ

बेनजीर की हत्या पर रोष

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की हत्या की कड़ी भर्त्सना की है. सुरक्षा परिषद ने पाकिस्तान की जनता से संयम बरतने और देश में स्थायित्व बरकरार रखने की अपील करते हुए कहा है कि इस अपराध को अंजाम देने वालों, योजना बनाने वालों और धन उपलब्ध कराने वालों को क़ानून का सामना करना पड़ेगा. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटना की कड़ी निंदा हो रही है. अमरीका ने इसे 'कायरतापूर्ण' कार्रवाई करार दिया है. अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने एक बयान में कहा ' यह एक कायरतापूर्ण कार्रवाई है और जिन्होंने ऐसा किया है उन्हें क़ानून का सामना करना पड़ेगा.' उन्होंने कहा कि ऐसे समय में उनका पूरा समर्थन पाकिस्तानी जनता के साथ है जो लोकतंत्र की बहाली चाहते हैं. संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान कि मून ने बेनज़ीर की हत्या की कड़ी भर्त्सना करते हुए कहा है कि यह एक नृशंस हत्या है और पाकिस्तान में अस्थिरता फैलाने के लिए ऐसा किया गया है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद इस मामले में एक आपात बैठक कर रहा है. ब्रिटेन सरकार ने भी बेनज़ीर की हत्या की निंदा की है और कहा कि ऐसी निरर्थक हिंसा का कोई मतलब नहीं है. प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने अपने बयान में कहा कि बेनज़ीर ने यह साबित कर दिया कि वो दिलेर महिला थीं. उन्होंने कहा कि भले ही बेनज़ीर भुट्टो अब हमारे बीच नहीं रहीं लेकिन पाकिस्तान को लोकतंत्र की राह बंद नहीं होती है. पाकिस्तान को लोकतंत्र की बहाल के लिए प्रयास करते रहना चाहिए. इससे पहले ब्रिटेन के विदेश मंत्री मिलीबैंड ने इसे जघन्य कृत्य बताया है और और पाकिस्तान में संयम और एकता की अपील की है. पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री और पीपुल्स पार्टी की नेता बेनज़ीर भुट्टो की गुरूवार, 27 दिसंबर 2007 को एक आत्मघाती हमले में हत्या कर दी गई है. बेनज़ीर भुट्टो इस्लामाबाद के नज़दीक रावलपिंडी में एक चुनाव रैली को संबोधित कर रही थीं और वह आत्मघाती हमले का शिकार हो गईं. राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ और उनकी सरकार ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है ताकि "आतंकवादियों को नापाक इरादों को नाकाम किया जा सके."
पाकिस्तान के एक अन्य पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने उनकी मौत पर गहरा शोक व्यक्त किया है.

सौजन्य- BBCHINDI

नफस-नफस, कदम-कदम

नफस-नफस कदम-कदम बस एक फ्रिक दम-ब-दम, घिरे हैं हम सवाल से हमें जवाब चाहिये, जवाब दर सवाल है कि इंकलाब चाहिये, इंकलाब ज़िन्दाबाद ज़िन्दाबाद इंकलाब

नयी पतितकारिता

आज दुष्यंत जी को फिर पढ रहा था, मेरे अंदर भी कहीं न कहीं एक दुष्यंत है शायद आप मैं भी हो। आज इस नकली पत्रकारिता के दौर मैं जहाँ हमारी नस्ल नें पत्रकारिता को बाजार के कोठे पर बिठा पर बिठा दिया है और खबरों का बलात्कार करना हम जैसों को सिखा दिया है, वहाँ दुष्यंत का एक एक शेर खबरों के हम्माम में हमें आज भी नगां कर रहा है। मैनें भी सोच रखा है की मुझे खबरों का बलात्कार कैसे करना है। मैं कुछ कुत्ते,बिल्ली,साँप,गधा,घोडा, पाल रहा हूं जो निश्चित रुप से खबरों का गोदाम मेरे लिए साबित होगा। माफ कीजीए तोता, कबूतर, भूल गया था और आप से भी गुजारिश है कुछ सलाह आप भी दें, ताकी आपका मित्र इस नये जमाने की शानदार पतितकारिता मैं अपना अमूल्य योगदान दे पाऐ। बहरहाल दुष्यंत जी के शेर हम जैसों की ईज्जत अफजाई के लिए लिख रहा हूँ। हर एक शेर जैसे उन्होनें आज के मीडिया के उच्च स्तरीय घटियापन को निशाने पर रख के लिखा हो । तुम्हारे पाँवों के नीचे कोई जमीन नहीं, कमाल ये है कि फिर भी तुम्हें यकी़न नहीं। मैं बेपनाह अँधेरे को सुबह कैसे कहूँ, मैं इन नजा़रों का अंधा तमाशबीन नहीं। तेरी जुबान है (मीडिया की) झूठी जम्हूरियत की तरह, तू एक जलील सी गाली से बेहतरीन नहीं । तुम्हीं से प्यार जताएँ तुम्हीं को खा जायें, अदीब यों तो सियासी हैं पर कमीन नहीं । तुझे कसम है ( मुझ जैसों को) खुदी को बहुत हलाक न कर, तू इस मशीन का पुर्जा़ है, तू मशीन नहीं । बहूत मशहूर है आयें जरूर आप यहाँ, ये मुल्क देखने के लायक तो है, हसीन नहीं । ज़रा-सा तौर-तरीक़ों में हेर-फेर करो, तुम्हारे हाथ में कालर हो, आस्तीन नहीं । सलाम दुष्यंत जी को और क्षमा एक भोपाली होने के नाते ।

Thursday, December 27, 2007

इंकलाब , इंकलाब , इंकलाब

इंकलाब , इंकलाब उफ इंकलाब हाय इंकलाब हद इंकलाब सुर्ख सा था इंकलाब गर्म सा था इंकलाब दिल मैं था जो इंकलाब अब जुबां पसंद ये इंकलाब, उफ इंकलाब हाय इंकलाब हद इंकलाब जमीं इंकलाब फलक इंकलाब थे ख्याल कभी इंकलाब, जवां उम्मीद थी तब इंकलाब फनां तारीख इंकलाब कयामत सा इंकलाब, उफ इंकलाब हाय इंकलाब हद इंकलाब रूह इंकलाब जिस्म इंकलाब मौतें मिलीं वो इंकलाब सांसें भी थीं जो इंकलाब दिल दिमाग इंकलाब तन बदन इंकलाब, उफ इंकलाब हाय इंकलाब हद इंकलाब जुबां पसंद अब इंकलाब नकली सा कुछ आज इंकलाब बदला हुआ सा इंकलाब ठहरा हुआ सा इंकलाब ठिठका हुआ सा इंकलाब घिसट रहा अब इंकलाब उफ इंकलाब हाय इंकलाब हद इंकलाब अंधा इंकलाब लंगडा इंकलाब बदला है वक्त ...................कहां इंकलाब ठडां क्यों खून ................. कहां इंकलाब हमसे तुम अलग .............. कहां इंकलाब घायल वतन .....................कहां इंकलाब रोता चमन ...................... कहां इंकलाब उफ इंकलाब हाय इंकलाब हद इंकलाब अब ख्याल इंकलाब झूठा सा सच अब इंकलाब गुम है आज इंकलाब ढूंढो कहीं अब इंकलाब इंकलाब , इंकलाब , इंकलाब अनुराग अमिताभ

पाकिस्तान ? बेनजीर की हत्या........

पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या कर दी गई है । बेनजीर की हत्या आत्मघाती हमलावर ने किया । बेनजीर की गले में गोली लगी थी । किसी देश का इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता है कि उस देश के नेताओं की हत्या दिन दहाड़े हो ? पाकिस्तान में आत्मघाती हमला कोई ने बात नही है । जिस देश के कर्ता - धर्ता सुरक्षित नही हैं तो उस देश की जनता का क्या हाल होगा ? भोली जनता भय के साये में सहमें हुए है । मेरा अपने साथियों से एक प्रश्न है - क्या किसी देश की राजनीति की हत्या कर उस देश का विकास किया जा सकता है ?

सुरक्षा अस्त्र

Text selection Lock by Hindi Blog Tips