चीन। एक विस्तृत सर्वेक्षण से पता चला है कि दीवार अब तक की अनुमानित लंबाई से भी ज़्यादा लंबी है। दो साल तक चले इस सर्वेक्षण में पता चला है कि दीवार की लंबाई 8,850 किलोमीटर है। अब तक आम तौर पर इस दीवार की लंबाई लगभग पाँच हज़ार किलोमीटर मानी जाती थी। अब तक के अनुमान मुख्य रूप से ऐतिहासिक आँकड़ों पर ही निर्भर रहे हैं। चीनी मीडिया के अनुसार इंफ़्रा-रेड और जीपीएस तकनीक के ज़रिए कुछ ऐसे हिस्से भी खोज निकाले गए हैं जो समय के साथ धूल मिट्टी में दब गए थे। इसके ज़रिए पता चला कि 6,259 किलोमीटर लंबे दीवार के हिस्से थे, 359 किलोमीटर की सुरंगें मिलीं और 2,232 किलोमीटर के पहाड़ या नदी जैसे प्राकृतिक अवरोध थे। ये अध्ययन सांस्कृतिक सभ्यता और सर्वेक्षण के सरकारी संगठन ने किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि दीवार के जो नए हिस्से मिले हैं वे मिंग राजवंश के दौरान बनाए गए थे और वे उत्तरी लिओनिंग प्रांत की हू पहाड़ियों से पश्चिमी गांसू प्रान्त के जिआयू दर्रे तक फैले हैं। ये परियोजना अभी अगले लगभग डेढ़ साल तक और चलेगी जिससे क़िन और हान राजवंशों के दौरान बनाई गई दीवार की लंबाई मापी जा सकेगी। ये दीवार चीनी साम्राज्य की उत्तरी सीमा को बचाने के लिए बनवाई गई थी। भूगर्भ वैज्ञानिक काफ़ी समय से इस तरह का सर्वेक्षण कराने की माँग कर रहे थे जिससे इस दीवार को और बेहतर ढंग से समझा जा सके। यूनेस्को ने 1987 में इसे विश्व की धरोहरों की सूची में शामिल किया था। दुनियाभर से पर्यटक इस दिवार को देखने के लिये चीन आते हैं।
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Thursday, May 14, 2009
आठ हज़ार किमी से भी लम्बी है चाईना वॉल
चीन। एक विस्तृत सर्वेक्षण से पता चला है कि दीवार अब तक की अनुमानित लंबाई से भी ज़्यादा लंबी है। दो साल तक चले इस सर्वेक्षण में पता चला है कि दीवार की लंबाई 8,850 किलोमीटर है। अब तक आम तौर पर इस दीवार की लंबाई लगभग पाँच हज़ार किलोमीटर मानी जाती थी। अब तक के अनुमान मुख्य रूप से ऐतिहासिक आँकड़ों पर ही निर्भर रहे हैं। चीनी मीडिया के अनुसार इंफ़्रा-रेड और जीपीएस तकनीक के ज़रिए कुछ ऐसे हिस्से भी खोज निकाले गए हैं जो समय के साथ धूल मिट्टी में दब गए थे। इसके ज़रिए पता चला कि 6,259 किलोमीटर लंबे दीवार के हिस्से थे, 359 किलोमीटर की सुरंगें मिलीं और 2,232 किलोमीटर के पहाड़ या नदी जैसे प्राकृतिक अवरोध थे। ये अध्ययन सांस्कृतिक सभ्यता और सर्वेक्षण के सरकारी संगठन ने किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि दीवार के जो नए हिस्से मिले हैं वे मिंग राजवंश के दौरान बनाए गए थे और वे उत्तरी लिओनिंग प्रांत की हू पहाड़ियों से पश्चिमी गांसू प्रान्त के जिआयू दर्रे तक फैले हैं। ये परियोजना अभी अगले लगभग डेढ़ साल तक और चलेगी जिससे क़िन और हान राजवंशों के दौरान बनाई गई दीवार की लंबाई मापी जा सकेगी। ये दीवार चीनी साम्राज्य की उत्तरी सीमा को बचाने के लिए बनवाई गई थी। भूगर्भ वैज्ञानिक काफ़ी समय से इस तरह का सर्वेक्षण कराने की माँग कर रहे थे जिससे इस दीवार को और बेहतर ढंग से समझा जा सके। यूनेस्को ने 1987 में इसे विश्व की धरोहरों की सूची में शामिल किया था। दुनियाभर से पर्यटक इस दिवार को देखने के लिये चीन आते हैं।
Thursday, November 29, 2007
वाह ये तो कमाल है...... ज़रा देखो तो.........









मेरे एक मित्र ने ये सारी तस्वीरें मेल की है। दरअसल इन्हे देखकर कोई यकीन नही कर सकता कि यहां तस्वीरों मे दिख रही सारी पेन्टिंग किसी कलाकार ने हाथ पर ही बनाई है। ये कहां की कलाकारी है इस बारे में जांच कर रहा हुँ। अगर आप को पता हो तो पोस्ट पर बतायें। बहरहाल सभी साथियों के लिये कुछ तस्वीरें यहां पर ड़ाल रहा हुँ देखीये और कलाकार की तारीफ किजीये............
परवेज़ सागर
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