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Wednesday, December 12, 2007
ज़िन्दगी की धूप मे किसी का खो जाना............
ज़िन्दगी की धूप मे किसी का खो जाना
इतना आसान नही होता किसी का दूर जाना
ज़रुरत की ऐसी आज़माईश क्यों करते है
जाने दूर होकर हज़ार शिकवे किससे करते है
हर आहट जिसकी एक आदत मालूम होती है
ना हो तो भी महसूस होती है
ऐसी कसक जो याद के आईने मे भी ढल ना पायी
और यूँ रह रह कर हर पल इतनी खामोशी के साथ तड़पाना
ज़िन्दगी की धूप मे किसी का खो जाना
माथे पर पसीने की बून्द बनकर अगर बह जाता
मुमकिन है कुछ क्षण की ठण्ड़क पड़ जाती
अब तो फरियाद की आस किसी से की नही जाती
जो बन सकता तो बन जाता कोई अफसाना
ज़िन्दगी की धूप मे किसी का खो जाना
माधुरी
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