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Saturday, April 4, 2009

आज के राजनितिक परिप्रेक्ष्य में -

ज़मीर बेचकर जिन्दा रहूँ, ये नामुमकिन मैं अपने आप से दंगा करूँ, ये नामुमकिन, ज़माना तुझको मसीहा कहे, ये मुमकिन हैं मगर मैं तुझको मसीहा कहूँ, ये नामुमकिन। - शायर श्री हारून रशीद 'गाफ़िल'

Saturday, February 28, 2009

"झील को दर्पण बना"

"झील को दर्पण बना"
रात के स्वर्णिम पहर में
झील को दर्पण बना चाँद जब बादलो से निकल श्रृंगार करता होगा चांदनी का ओढ़ आँचल
धरा भी इतराती तो होगी...
मस्त पवन की अंगडाई
दरख्तों के झुरमुट में छिप कर परिधान बदल बदल
मन को गुदगुदाती तो होगी.....
नदिया पुरे वेग मे बह
किनारों से टकरा टकरा दीवाने दिल के धड़कने का
सबब सुनाती तो होगी .....
खामोशी की आगोश मे रात जब पहरों में ढलती होगी
ओस की बूँदें दूब के बदन पे फिसल लजाती तो होगी ......
दूर बजती किसी बंसी की धुन
पायल की रुनझुन और सरगम
अनजानी सी कोई आहट आकर
तुम्हे मेरी याद दिलाती तो होगी.....

Wednesday, February 4, 2009

"एहसास"

"एहसास"
हर साँस मे जर्रा जर्रा पलता है कुछ, यूँ लगे साथ मेरे चलता है कुछ. सोच की गागर से निकल शब्द बन अधरों पे खामोशी से मचलता है कुछ. ये एहसास क्या ... तुम्हारा है प्रिये ??? जो मोम बनके मुझमे , बर्फ़ मानिंद ..... पिघलता है कुछ

Tuesday, December 16, 2008

"द्रष्टि"

"द्रष्टि"
अनंतकाल से ये द्रष्टि प्रतीक्षा पग पर अडिग ,
पलकों के आंचल से
सर को ढांक ,
आतुरता की सीमा लाँघ
अविरल अश्रुधारा मे
डूबती , तरती , उभरती ,
व्याकुलता की ऊँचाइयों को छु
प्रतीक्षाक्षण से तकरार करती
तुम्हारी इक आभा को प्यासी
अनंतकाल से ये द्रष्टि
प्रतीक्षा पग पर अडिग

Friday, December 12, 2008

"मौन का उपवास"

"मौन का उपवास" अनुभूतियों का आचरण शालीन सभ्य सह्रदय हुआ, और भावः भी चुप चाप हैं, अधरों पे आके थम गया शब्दों का बढ़ता कारवां, स्वर कंठ में लुप्त हुए, क्या "मौन" का उपवास है

Wednesday, December 10, 2008

" मायाजाल"

" मायाजाल"
ह्रदय के मानचित्र पर पल पल तमन्नाओं के प्रतिबिम्ब उभरते रहे, यथार्थ को दरकिनार कर कुछ स्वप्नों ने सांसे भरी... छलावों की हवाएं बहती रही बहकावे अपनी चाल चलते रहे, कायदों को सुला , उल्लंघन ने जाग्रत हो अंगडाई ली.. द्रढ़निश्चयता का उपहास कर संकल्प मायाजाल में उलझते रहे, ह्रदय के मानचित्र पर पल पल तमन्नाओं के प्रतिबिम्ब उभरते रहे..

Saturday, December 6, 2008

तुम बिन

'तुम बिन"
हर गीत अधुरा तुम बिन मेरा,
साजों मे भी अब तार नही..
बिखरी हुई रचनाएँ हैं सारी,
शब्दों मे भी वो सार नही...
जज्बातों का उल्लेख करूं क्या ,
भावों मे मिलता करार नही...
तुम अनजानी अभिलाषा मेरी,
क्यूँ सुनते मेरी पुकार नही ...
हर राह पे जैसे पदचाप तुम्हारी ,
रोकूँ कैसे अधिकार नही ...
तर्ष्णा प्यासी एक नज़र को तेरी,
मिलने के मगर आसार नही.....

Thursday, December 4, 2008

शब्दों की वादियाँ"

"शब्दों की वादियाँ"
शब्दों की वादियों मे विचरता ये मन , खोज रहा कुछ ऐसे कण , जो सजा सके मनोभावों को, चाहत के सुंदर साजों को, लुकती छुपती अभिलाषा को, नैनो मे दुबकी जिज्ञासा को, सिमटी सकुचाई आशा को, निश्चल प्रेम की भाषा को, शब्दों की वादियों मे विचरता ये मन , खोज रहा कुछ ऐसे कण............

Thursday, November 20, 2008

"कभी कभी"

"कभी कभी"
दिल मे बेकली हो जो, " कभी कभी" क्यूँ शै बेजार लगे हमे सभी कोई तम्मना भी न बहला सकी, क्यूँ हर शाम गुनाहगार लगे" कभी कभी..........."

Monday, November 17, 2008

"कतरा कतरा"

"कतरा कतरा" कतरा कतरा दरया देखा , कतरे को दरया में न देखा , लम्हा लम्हा जीवन पाया, जीवित एक लम्हे को न पाया, आओ हम दोनों मिलकर एक लम्हे को जिंदा कर दें, प्रेम प्रणव से जीवन भर दें

Friday, November 14, 2008

"वीरानो मे"

"वीरानो मे"
खामोश से वीरानो मे, साया पनाह ढूंढा करे, गुमसुम सी राह न जाने, किन कदमो का निशां ढूंढा करे.......... लम्हा लम्हा परेशान, दर्द की झनझनाहट से, आसरा किसकी गर्म हथेली का, रूह बेजां ढूंढा करे.......... सिमटी सकुचाई सी रात, जख्म लिए दोनों हाथ, दर्द-ऐ-जीगर सजाने को, किसका मकां ढूंढा करें ........... सहम के जर्द हुई जाती , गोया सिहरन की भी रगें , थरथराते जिस्म मे गुनगुनाहट, सांसें बेजुबां ढूंढा करें................

Wednesday, November 12, 2008

"सजाएं"

"सजाएं"
इस खामोशी मे भी हरदम तुमसे बातें होतीं हैं , दूर जुदा रह कर भी ख्यालों मे मुलाकातें होती हैं.... हमको वफा का इनाम दिया , जी भर के इल्जाम दिया , तुमने हमको भुला दिया ये सोच के ऑंखें रोती हैं....
क्या खोया क्या पाया था जीवन युहीं गवांया था , तुमने भी ठुकराया है अब खोने को सांसें होती हैं.....
एक बोझ मगर सीने मे है , कौन सा ऐसा जुर्म हुआ , चाहत मे मर मिटने की क्या खोफ-जदा "सजाएं" होतीं हैं

Wednesday, November 5, 2008

"प्यार बेशुमार लिखूं"

"प्यार बेशुमार लिखूं"
अपने खामोश तकल्लुम मैं ये इज़हार लिखूं, हर जगह तेरे ही एक नाम की तकरार लिखूं... एक हरकत भी कलम की हो तुझे प्यार लिखूं, प्यार तू एक लिखे मैं तुझे सो बार लिखूं.... बेकरारी भरे दिल का तू ही है करार लिखूं, अपनी इन तेज बदहवास धड़कनों की रफ़्तार लिखूं... आज लाया हूँ तुझे दिल का ये उपहार लिखूं, हाँ मिलन के है अब बहुत जल्द ये आसार लिखूं.... तेरी नज़रों ने जो उठाया है वो खुमार लिखूं ,
अपने हर लफ्ज़ से तुझे प्यार बेशुमार लिखूं...

Monday, November 3, 2008

" तेरा होना "

" तेरा होना "
मुझे भाता है मेरे साथ मे तेरा होना, सोच मे बात मे जज्बात मे तेरा होना
जिंदगी के मेरे हर साज़ मे तेरा होना,
मेरे सुर मे मेरी आवाज़ मे तेरा होना, पल पल की बंधती हुई आस मे तेरा होना, मेरे हर एहसास के एहसास मे तेरा होना रूह मे रूह की हर प्यास मे तेरा होना, जीस्त की बाकी हर एक साँस मे तेरा होना, लगता है अब ये सफर सुख से गुजर जाएगा जब से पाया है मैंने साथ में तेरा होना .....

Monday, October 20, 2008

"सुखमय प्यार "

"सुखमय प्यार "
कब से तुझे निहार रहा हूँ , चंचल सुंदर मुख मंडल , अपने से मैं हार रहा हूँ ..... यह वो ही तो दिन है जब मैने मांग भरी तुम्हारी , गजरा ये सुख की बेला मैं तब से तुम्हें पुकार रहा हूँ , आ जाओ अब चैन नहीं है सुख देता दिन रैन नही है , जीवन सफल करो तुम आ कर कह दूँगा साकार रहा हूँ , मैं तेरा जन्म जन्म का प्रेमी तेरा सुखमय प्यार रहा हूँ ..."

Wednesday, October 15, 2008

"इल्जाम ले लो"

"इल्जाम ले लो"
ज़ब्त से कुछ काम ले लो, ख़ुद पे यह इल्जाम ले लो...
जिसका डर था हो न जाए, उसको अपने नाम ले लो...
कुछ नशा है उखडा उखडा, आओ हम से जाम ले लो ...
गिर न जाएं देखना तुम , अपने हाथों थाम ले लो...
नाम मेरा क्या करोगी , आशिके बदनाम ले लो "

Wednesday, October 1, 2008

"कभी आ कर रुला जाते"

"कभी आ कर रुला जाते"
दिल की उजड़ी हुई बस्ती,कभी आ कर बसा जाते कुछ बेचैन मेरी हस्ती , कभी आ कर बहला जाते... युगों का फासला झेला , ऐसे एक उम्मीद को लेकर , रात भर आँखें हैं जगती . कभी आ कर सुला जाते ...
दुनिया के सितम ऐसे , उस पर मंजिल नही कोई , ख़ुद की बेहाली पे तरसती , कभी आ कर सजा जाते ... तेरी यादों की खामोशी , और ये बेजार मेरा दामन, बेजुबानी है मुझको डसती , कभी आ कर बुला जाते... वीराना, मीलों भर सुखा , मेरी पलकों मे बसता है , बनजर हो के राह तकती , कभी आ कर रुला जाते.........

Wednesday, September 24, 2008

"अपलक" बिना झपकाए मैं, अपलक देखूं, तुम को देखने की, अपनी ललक देखूं

Monday, September 22, 2008

"तेरी चाहत"

"तेरी चाहत"
तेरी हर अदा पे मुझे बस प्यार आता है, जब मेरे साथ तू होती है करार आता है..
तेरी आँखें है सनम, या के हैं जाम-ऐ-शराब, तेरी नज़रों को मैं देखूं तो खुमार आता है..
तू मेरे सामने है, ख्वाब हो , बेदारी हो, अपनी बांहों में लिए तुझ को चला जाता हूँ..
तुझसे मिलने पे जो आजाए जुदाई का ख़याल, दिल में तूफ़ान सा उठता ही चला जाता है..
तेरी चाहत की मेरे दिल में है हद कितनी, कहाँ ग़ज़लों में या अल्फाज़ में कह पाता हूँ ..

Wednesday, September 17, 2008

"आशनाई"

"आशनाई"
'नज़र से नज़र" कभी मिलाई तो होती.... दिल की बात कभी हमसे भी, बनाई तो होती.... क्यूँ कर रही शबे-फुरकत से' आशनाई सारी रात.....
कभी मेरी तरह अंधेरों मे,
"आईने से आंख लडाई तो होती "
(शबे फुरकत- विरह की रात )

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