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Wednesday, July 8, 2009
बढ़ रही है भारत मे डायबिटीज़ के मरीज़ो की संख्या
दुनिया भर में हर दस सेकेंड में किसी न किसी की डायबिटीज़ यानी मधुमेह से मृत्यु हो जाती है। उन्हीं दस सेकेंड में किन्हीं दो लोगों में इसके लक्षण पैदा हो जाते हैं। पिछले साल दुनिया में इस बीमारी से मरने वालों की संख्या 38 लाख थी। यानी मरने वाले सभी लोगों का छह प्रतिशत। एक अनुमान के अनुसार इस समय दुनिया भर में 24 करोड़ 60 लाख लोग डायबिटीज़ से पीड़ित हैं और 2025 तक इस संख्या के 38 करोड़ हो जाने की आशंका है।
हाल ही में चेन्नई में संपन्न हुए दक्षिण-पूर्व एशिया में डायबिटीज़ सम्मेलन में प्रमुख स्वास्थ्य विशेषज्ञों, स्वास्थ्य मंत्रियों, दानकर्ताओं और राष्ट्रीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने इन्हीं विषयों पर अपनी चिंता का इज़हार किया। सम्मेलन का आयोजन, विश्व स्वास्थ्य संगठन, वर्ल्ड डायबिटीज़ फ़ाउंडेशन, अंतरराष्ट्रीय डायबिटीज़ फ़ेडेरेशन और विश्व बैंक ने संयुक्त रूप से किया था। सम्मेलन में भारत की स्थिति पर विशेष रूप से चिंता प्रकट की गई क्योंकि भारत में सबसे बड़ी आबादी मधुमेह से पीड़ित है। देश में इस समय डायबिटीज़ के मरीज़ों की संख्या चार करोड़ है जिसके 2025 तक सात करोड़ हो जाने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
डायबिटीज़ जानलेवा है लेकिन समय रहते इस पर क़ाबू पाया जा सकता है। जैसे, सम्मेलन में हिस्सा ले रहे पुणे के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉक्टर चित्तरंजन सकरलाल याज्ञनिक का कहना था कोशिश यह होनी चाहिए कि यह रोग माँ से बच्चे में न जाने पाए। उनका कहना था, "हर लड़की की नियमित जाँच ज़रूरी है। क्योंकि गर्भावस्था में यह रोग माँ से शिशु में बहुत आसानी से प्रविष्ट हो सकता है। सब जानते हैं कि यह आनुवंशिक है। लेकिन इसको नियंत्रित किया जा सकता है"। इसका शरीर के कई अंगों पर असर होता है। दस साल लगातार इस रोग को झेल चुके रोगी की आँखों की रोशनी तो प्रभावित होती है उसके अन्य अंग भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।
डायबिटीज़ के रोगी यूँ तो दुनिया भर में फैले हुए हैं लेकिन भारत, बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका जैसे दक्षिण एशियाई देशों में इनकी संख्या चिंताजनक हद तक बढ़ चुकी है। डायबिटीज़ होने के प्रमुख कारणों में पौष्टिक आहार की कमी और माता या पिता में इसके लक्षण होना तो शामिल हैं। कहते हैं एक बार डायबिटीज़ हो जाने पर उसे नियंत्रित तो किया जा सकता है, पूरी तरह दूर किया जाना अब भी आसान नहीं है। इसीलिए इसका न होना ही अच्छा और यह आपके अपने बस में हैं। (साभार-बीबीसी.कॉम)
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