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Sunday, August 16, 2009
स्वाइन फ्लू हाय स्वाइन फ्लू
देश भर में मीडिया ने स्वाइन फ्लू का इस कद्र आतंक मचा रखा है कि लोग डरे और सहमे हुए हैं। देश के नामी गिरामी डॉक्टर भी चुप्पी साधे इन चैनलों के यस मैन बने हुए है। डॉक्टर जानते हैं कि यह स्वाइन फ्लू और कुछ नहीं केवल जुकाम का ही एक रूप है। लेकिन क्या मजाल कि कोई एन चैनल वालों के खिलाफ बोले। स्वाइन फ्लू की एक मौत से देश भर में हंगामा मचा देने वाले मीडिया ने कभी इस बात की पड़ताल कि है क्या कि निमोनिया से हर रोज कितने लोग मरते हैं। अगर डॉक्टर की माने तो स्वाइन फ्लू से अधिक मौत तो निमोनिया से होती है। निमोनिया ही क्यूँ ,कैंसर की बात कर लो। श्रीगंगानगर इलाके में ना जाने कितने लोग कैंसर से दम तोड़ चुके हैं और कितने ही अपनी बारी का इंतजार कर रहें हैं। मेरे ससुराल में दो साल में तीन मौत कैंसर से हुई हैं। न्यूज़ चैनल्स को या खबरें नहीं मिलती,या उनकी नजर खबरों पर हैं नहीं,या फ़िर वे खबरे देना नहीं चाहते। ऐसा लगता है कि किसी ना किसी प्रकार से मल्टी नेशनल कंपनियों ने ऐसा जाल बुना है कि सब चैनल स्वाइन फ्लू की चपेट में आ गये। मल्टी नेशनल वालों को इस से भोले भाले चैनल और कहाँ मिलेंगें। कुछ ही दिनों में अरबों खरबों का कारोबार करके अपने घर बैठ जायेंगें। उसके बाद ना तो स्वाइन होगा न फ्लू। कितने अफ़सोस की बात है कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, जो चिकित्सकों की सबसे बड़ी और जानी मानी संस्था है, वह भी इस बारे में कुछ नहीं बोल रही। जबकि उनके पास तो प्रमाण सहित सब कुछ होगा। नेताओं की तो कुछ ना पूछो, उनको तो वोट बैंक से मतलब है। किंतु डॉक्टर तो सच्चाई का बयान कर ही सकते हैंशायद उनको लगता होगा कि नक्कार खाने में उनकी बात सुनेगा कौन। इस स्वाइन फ्लू ने ना कितने लोगों का धंधा एक दम से चमका दिया होगा।यूँ तो हम अपने आपको इक्कीसवीं सदी में बतातें है और काम करते हैं ऐसे जैसे हमने अपना दिमाग किसी मल्टी नेशनल कंपनी के यहाँ गिरवी रख दिया हो। उसके बाद वही देखेंगे,सुनेंगें,करेंगें जो वे कहेंगें। क्योंकि उनकी हाँ में हाँ मिलने में ही वारे न्यारे है। जय हो स्वाइन फ्लू की। भाड़ में जाए अन्य बीमारी, उनसे तो हर रोज़ लोग मरते हैं।
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