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Sunday, February 15, 2009
मिलन का क्षण
अनबुझ प्यास
प्रेम की आस
मिलन का क्षण ।
प्यासी धरती
कहीं दरकी
तृषार्त मन ।
बादल घनघोर
छाये चहुँ और
आया सावन ।
बूंदें टपटप
बने धार अब
भीगे तनमन ।
तृप्त हुई देह
मन मे भरा नेह
प्रमुदित आनन
Friday, May 9, 2008
मन में उमंग
पानी में तरंग
मन में उमंग
प्रेम की पतंग
उठने दो
रिमझिम बरसात
धडधड प्रपात
मनका अवसाद
गिरने दो
रात की बात
सपनों का साथ
हाथों में हाथ
रहने दो
वीणा झंकार
विविध प्रकार
सपनें साकार
होने दो
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