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Saturday, March 1, 2008

बजट या चुनावी घोषणापत्र ?

बचपन से ये नसीहतें सुनता आया हूं - बजट बनाकर काम करो। जितना बजट एलॉउ करे उतना ही ख़र्च करो। कभी घरवालों से, कभी बड़े-बूढ़ों से तो कभी दोस्तों से। हां, ये अलग बात है कि ये कला अभी तक नहीं सीख पाया। ख़ुद न सीख पाने की नाकामी कहें या कुछ और... पर अब मैं भी मानने लगा हूं कि बजट बनाना एक महान कला है। जो इस कला में पारंगत हैं, उसके धनी होने की उम्मींद बढ़ जाती है। कल जब चिदंबरम साहब का बजट देखा तो ये क्लियर हो गया कि चुनावों में कामयाबी का रास्ता भी बजट से ही होकर जाता है। यानि बजट कामयाबी की सीढ़ी है। हर बजट एक योजना है...एक जुगत है...कभी मौजूद संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की, कभी पैसे बचाने की, तो कभी चुनाव जीतने की। लेकिन, चिदंबरम जी के बजट को क्या कहें......ये आप तय करें। वैसे कल के बजट ने आज के अख़बारों की सुर्खियां ख़ूब बटोरी हैं। भले ही कुछ राजनीतिक पार्टियां और मीडियावाले इसे चुनावी बजट बता रहे हों, लेकिन हर ख़ासोआम अख़बार-टीवी में चीजों की कीमतों के घटने की घोषणा देख-देख कर चिदंबरम साहब की जय बोल रहा है। कम-से-कम टीवी में दिखाए गए वॉक्सपॉप तो यही साबित करने में लगे हैं। ये सब देख-सुनकर मन में कुछ सवाल कुलबुला रहे हैं........जितने भी बजट पहले देखे हैं उनमें सरकार कभी तो ग़रीब किसानों के कर्ज़ माफ़ करती आई है, कभी आयकर का दायरा बढ़ा देती है तो कभी क़ीमतें घटती हैं। घोषणाएं ऐसी होती हैं जैसे बस एकदम देश की तस्वीर बदलने वाली है। लेकिन तस्वीर तो बद से बदतर होती जा रही है। अमीरी और ग़रीबी के बीच की खाई पाटे नहीं पट रही। सरकार किसानों को कर्ज़ देती है, वो जब चुका पाने में नाकाम होते हैं तो ख़ुदकुशी करने लगते हैं। फिर कर्ज़ माफ़ी की घोषणा हो जाती हैं। लेकिन, वो रास्ता कभी नहीं तलाशा जाता जिससे किसान आत्मनिर्भर हो सके। उसे कर्ज़ लेने की नौबत ही न आए। ऐसी नीतियां क्यों नहीं बनतीं कि किसानों को सस्ते ब्याज़ दर में लोन मिले और वो उसे चुका पाए। भीख चाहे 60 करोड़ की ही क्यों न हो, सराही तो नहीं जा सकती। देश की समस्याओं से लड़ने का बजट क्यों नहीं बनाया जाता, गरीबी हटाने का बजट कब बनेगा? जब चुनाव आने वाले होते हैं तो अक़्सर सरकारें लुभावने बजट देती हैं, लेकिन इससे किसानों को, ग़रीबों को कितना फ़ायदा पहुंचता है ये किसी से छिपा नहीं है। बहरहाल... अब तो बजट पेश करते वक़्त जनता को सुनहरे ख़्वाब दिखाने का ट्रेंड भी शुरू हो रहा है। हर रूलिंग पार्टी का लास्ट बजट....बजट कम चुनावी घोषणापत्र अधिक जान पड़ता है। ये बात केवल लालू के रेल बजट या चिदंबरम के आम बजट की नहीं है, पिछल कुछ सालों के बजट के दौरान हुई घोषणाएं इस बात को पुख़्ता आधार देती हैं।

What analysts say about Budget...

Analysts View: (Courtesy: Yahoo Web News) India's 2008/09 budget Finance Minister Palaniappan Chidambaram on Friday presented the fifth and final full budget of the ruling coalition before it faces elections due by May 2009. COMMENTARY: SHUBHADA RAO, CHIEF ECONOMIST, YES BANK, MUMBAI: "It's in line with expectations. The budget has a large rural flavour. Some anti-inflationary measures in the form of excise cuts have been effected. "Tax targets appear ambitious as indicated by a modest fiscal deficit. The emphasis on social sectors like health, education and the rural economy do suggest that the budget is leaning towards some populist measures. "We await details of the funding of the farm loans waiver, which at this point appears a concern." SHARMILA JOSHI, ASST VICE PRESIDENT, PRABHUDAS LILLADHER, MUMBAI: "Overall, a positive budget. We expected it to be populist and it is on those lines. The duty cuts and rural segment focus show they are trying to filter down benefits to the lower end of society. Markets may have reacted negatively on the increase in short-term capital gains tax, but we think there will not be too much impact." RUPA REGE NITSURE, CHIEF ECONOMIST, BANK OF BARODA, MUMBAI: "The budget has effectively responded to the concerns voiced by the economic survey on Feb. 28. While the fiscal deficit target has been met because of buoyant tax revenues, technical and allocative efficiencies in expenses have not improved. "Revenue deficit at 1.4 percent of GDP will act as a major hurdle in achieving fiscal consolidation. The budget has made a serious attempt to stimulate consumption demand by reducing indirect taxes on consumer durables like small cars, two- and three-wheelers etc., and by raising the personal income tax exemption limit. "From the bank's perspective, the waiver of small farm loans in not a negative thing entirely as these were the most stubborn NPAs on banks' loan books. There is comfort that the government will partially bear the burden for banks." SHUCHITA MEHTA, CHIEF INDIA ECONOMIST, STANDARD CHARTERED BANK, MUMBAI: "The focus is on inflation, the social sector and consumer. However, capital spending is a little disappointing. The reduction of the fiscal deficit in '08/09 to 2.5 percent is positive, however it may not include the impact of the pay commission, so it could be higher than forecast. A lower than expected gross borrowing programme is positive from the market perspective." HAN-SIA YEO, STRATEGIST AT BANK OF AMERICA, SINGAPORE: "It is an election budget. The personal income tax changes are definitely welcomed. The smaller than expected borrowing requirement and budget deficit is a positive and the fiscal stimulus should offer some growth support." A. PRASANNA, ECONOMIST AT ICICI SECURITIES, MUMBAI: "It is a progressive, inclusive budget. Despite high provisions of social expenditure and the cost of the farm loan waiver, the finance minister has managed to better the budgeted fiscal deficit target which is a pleasant surprise and bond positive." DEVESH KUMAR, MANAGING DIRECTOR, CENTRUM BROKING, MUMBAI: "Most of the banks have written off their non-performing assets. So the write-off of the loans to farmers may not have much impact. If the government gives some support to the banks, then it will be positive." MARKET REACTION: The stock market was down 2 percent after the government proposed to increase the short-term capital gains tax; shares in Indian vehicle makers rose due to budget proposals to cut excise duties on vehicles bank shares fell due to a proposal to waive the debts of small farmers The yield on the 10-year federal bond was at 7.58 percent, down four basis points from before the budget speech and an intra-day high of 7.66 percent. It had ended at 7.60 percent on Thursday. The partially convertible rupee was at 39.96/97 per dollar, weaker than 39.86/87 beforehand. It had ended at 39.87/88 on Thursday. LINKS: Ministry of Finance Web site at finmin.nic.in and the Press Information Bureau Web site at pib.nic.inand also at http://indiabudget.nic.in. BACKGROUND: - Growth has slowed to an estimated 8.7 percent this fiscal year from a scorching 9.6 percent in 2006/07. - A finance ministry survey said on Thursday that keeping growth at 9 percent would be a challenge, due to inflation and infrastructure bottlenecks, and raising it to double digits would require more reforms. - National elections are due by May 2009. - Farm growth is estimated to slow to 2.6 percent in 2007/08 from 3.8 percent in 2006/07. - Data released on Friday showed annual wholesale price inflation -- the country's main inflation indicator -- in the week to Feb. 16 was 4.89 percent, the highest since June last year....

Sunday, February 24, 2008

सपने बीनता बचपन


सड़क पर पडा
बादलों से झांकती
धूप का एक टुकडा
जिसे बिछा कर
बैठ गया वो
उसी सड़क के
मोड़ पर
घर पर अल सुबह
माँ के पीटे जाने के
अलार्म से जागा
बाप की शराब के
जुगाड़ को
घर से खाली पेट भागा
बहन के फटे कपड़ो से
टपकती आबरू
ढांकने को
रिसती छत पर
नयी पालीथीन
बाँधने को
बिन कपड़े बदले
बिन नहाए
पीठ पर थैला लटकाए
स्कूल जाते
तैयार
प्यारे मासूम
अपने हम उम्रो
को निहारता
बिखरे सपनो को
झोली में
समेटता
ढीली पतलून
फिर कमर से लपेटता
जेब से बीडी निकाल कर
काश ले
हवा में
उछाल कर
उडाता
अरमानों को
जलाता बचपन को
मरोड़ता
सपनो को
चल दिया
वो उठ कर
समेत कर
वह एक टुकडा
धूप का
वही बिछा है
अभी भी
देख लें जा कर कभी भी
वो सुनहरा टुकडा
अभी भी वही है
पर
उस पर बैठा बच्चा
अब नही है !!!!

mailmayanksaxena@gmail.com

बुंदेलखंड

आज शाम से ही कुछ बेचैन सा था अक्सर ही करता रहता हूँ रिक्शे वालों का साक्षात्कार जब वो मुझे एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाते हैं इस बीच ज्यादातर रिक्शेवाले बुंदेलखंड के निकले कुछ तीन साल से आए हैं कुछ एक साल से और कुछ दो महीने पहले आज जो रिक्शेवाला मिला दो महीने पहले ही महोबा से आया है मैंने पूछा सुना है वहां सूखा पड़ा है उसने बोला पिछले कई सालों से इसलिए ही तो यहाँ चला आया हूँ बीस बीघे की खेती है पर चार सालों से पानी के इंतजार में खेत सूखा पड़ा हुआ है लोग काम की तलाश में बाहर जा रहे हैं कईयों ने तो क़र्ज़ चुकाने के बजाय आत्महत्या का रास्ता अपनाया है दें भी तो कहाँ से दें मैंने पूछा सरकार क्या कर रही है उसने बोला कुछ नही उसके बाद से ही बेचैन हूँ गुस्सा भी उमड़ आता है जनता हूँ कि बुंदेलखंड का सूखा और इससे उपजी आग पर चुनावी पार्टियाँ अपनी रोटियां पकाएँगी अपनी ज़िम्मेदारी से बचते हुए एक दूसरे पर आरोप लगाएंगी दरअसल समस्या को सुलझाने का ये उनका अपना तरीका है और इसमे उनकी आपसी सहमति भी है कुछ सलाह भी आए हैं मसलन बुंदेलखंड को अलग राज्य बनने का लगता है पिछले कई सालों के सूखे पर नज़र सिर्फ़ इसलिए नही पड़ी कि उत्तरप्रदेश एक बड़ा राज्य है लगातार किसानों की आत्महत्या की खबरें सिर्फ़ इसलिए नही पढ़ पाए क्यूंकि उत्तरप्रदेश की जनसंख्या बहुत ज्यादा है और हर जिले में रोज कोई न कोई तो ज़िंदगी से मुक्ति का रास्ता फंदे से झूलकर या सल्फास निगलकर खोज लेता है अब इतने बड़े राज्य में जिसकी जनसंख्या सोलह करोड़ से ज्यादा है किस किस का हाल जाने और किस किस के मर्ज़ का इलाज करें अलग राज्य बनाने की अलाप अपने अपने सुर में कई पार्टियों ने उठाई है लगातार आती मौत की ख़बरों के बीच बड़े पैमाने पर होते पलायन के बीच बड़ी दूर की सोच रखती हैं पार्टियाँ खली पेट जो घंटों से सभा स्थल पर खड़े हैं उन्हें उपदेश पिलाते हुए कि हम आपके दुःख दर्द में साथ हैं एक अलग राज्य की आपको ज़रूरत है थके हारे बेदम पैर शाम को घर पहुँचते हैं बुझे हुए चूल्हे को देखते हुए परेशान दिमाग सोचता हुआ सा अगर बैंक , साहूकार की जिल्लत से सुबह शाम पेट की भूख से अलग राज्य के लिए जो कमीशन बनाया जाएगा उसकी सिफारिशें आने और लागू होने तक हम ख़ुद को बचाए रख सके तो हमारा भविष्य उज्जवल है ।

आतंकवादी


कहीं पढा था
बड़े बुज़ुर्गों से भी सुना था
सपने देखना अच्छी बात है
सपने ऊँचे देखना चाहिए, बड़े देखना चाहिए
एक छोटे बच्चे ने भी देखा था सपना
एक छोटा सा सपना
उसके जैसे न जाने कितने लोगों ने
देखा होगा कुछ ऐसा ही सपना
सोचा था सपना छोटा है
इसलिए पूरा होने की उम्मीद भी रखी
लेकिन जब सपने की उस मज़बूत चादर के तार
झीने पड़ने लगे
फटने लगे
टूटने लगे तो साथ ही
उसके सपने
उसकी उम्मीदें
विश्वास भी
तार-तार होकर बिखरने लगे
अपने पराए लगने लगे
और अपनों में बेगाना वो
हर पल खण्डित होते विश्वास
से परास्त हो गया
और
बन गया
आतंकवादी।
(आतंकवादी कोई बचपन से नहीं होता, समाज बना देता है)

स्मृति

Friday, February 22, 2008

सवाल

आस पास टूट फुट हो, तो हाथो में समेट लूँ मन भर कर अफ़सोस फ़िरे बहार फेंक भि दूँ पर आज कया करूं? दिल अपना टूटा सा है, इन फ़ैली भावनाओ को सुलझाऊ तो केसे? भिखरी भिखरी बातो को बताऊँ भि तो किसे ? अजीब होते है बंधन निभाऊ भि तो केसे? कुछ ऐसे ही ... ढेरों सवालो का अम्बार बरसाऊ भि तो किस पे? कीर्ती वैद्य.....

Thursday, February 21, 2008

आप समझें तो ....

आप समझें तो कुछ कहें हम भी आप कह दें तो कुछ सुनें हम भी बैठिये तो हमारे पहलू में कोई ताज़ा ग़ज़ल लिखें हम भी इस समंदर में हैं छुपे मोती साथ उतरें तो कुछ चुनें हम भी मोड़ के उस तरफ़ उजाला है मोड़ तक साथ तो चलें हम भी रात की तीरगी नहीं जाती चाँद दुश्मन है क्या करें हम भी जी हुज़ूरों की भीड़ है हर सू भीड़ टूटे तो फ़िर जुड़ें हम भी हम मुसाफिर हैं और 'तनहा' भी कोई खिड़की खुले ' रुकें हम भी ' 'प्रमोद कुमार कुश 'तनहा'

IMPORTANT FOR GIRLS & WOMEN

A woman at a Gas night club (Mumbai) on Saturday night was taken by 5 men, Who according to hospital andpolice reports, gang raped her before Dumping her at Bandstand Mumbai. Unable to remember the events of the evening, tests later confirmed therepeat rapes along with traces of rohypnol in herblood. Rohypnol, date rape drug is an essentially a small sterilization pill. The drug is now being used by rapists at parties torape AND sterilize their victims. All they have to dois drop it into the girl's drink. The girl can't remember a thing the next morning, of all that hadTaken place the night before. Rohypnol, which dissolves in drinks just as easily, is such that the victim doesn't conceive from the rape and the rapist needn't worry about having a paternity test identifying him months later.The Drug's affects ARE NOT TEMPORARY - they are PERMANENT. Any female that takes it WILL NEVER BEABLE TO CONCEIVE. The weasels can get this drug from anyone who is in the vet school or any university. it's that easy, and Rohypnol is about to break out bigon campuses every where. Believe it or not, there are even sites on the Internet telling people how to use it. Please tell this to everyone you know, especially girls. Girls, becareful when you're out and don't leave your drink unattended. (added - Buy your own drinks, ensure bottles or cans received are Unopened or sealed; don't even taste someone else's drink)

Wednesday, February 20, 2008

उमड़-घुमड़

कुछ उमड़ता घुम्ड़ता आया खोल पट, छुआ शीतल स्पर्श इक मधुर स्वर गुंजन, किसी अभिलाषा का स्पंदन गगरी से छलकी नमकीन बूंदे भर आँचल, चुगती तारे जोड़ यादे, पिघलती राते खींच बादल, कुम्हलाती बाते......... कीर्ती वैद्य

पाकिस्तान मे लोकतंत्र की जीत

मंगलवार शाम तक आए चुनाव परिणामो से साफ हो गया है की पाकिस्तानी जनता मुल्क मे लोकतंत्र चाहती है.वह की जनता ने तो अपने मन की बात बता दी है,लेकिन अब सारी जिम्मेदारी वह के सिआसतदानो पर आ गई है.संयुक्त विपच को जिसमे पीपीपी और पीमल(न) भी शामिल है को मिल कर मजबूत सरकार बनानी होगी .नेताओ को अपनी आपसी मसलों को समझदारी से सुलझाना होगा तभी भविष्य मे फौज को सत्ता पर कब्जा करने से रोक सकेंगे वरना इतिहास अपने आप ko duhrata hai.

मेरा क्या चाहें मैं रहूँ या ना ....?

मैं कल शाम को चौडा मोड़ की तरफ़ कुरियर करने गया था । लौटते समय मैं देखा की दो युवक एक रिक्सा वाले को बेदर्दी से पिटते जा रहे थे । वहां बहुत लोग इक्कठा थे लेकिन कोई भी बीच बचाव की मुद्रा में नजर नही आ रहे थे ... मुझसे रहा नही गया ....मैं आगे बढ़कर बीच -बचाव करने लगा ... मैं रिक्सा वाले की ढल बनकर खड़ा हो गया और दोनो से निवेदन करने लगा की इसको छोड़ दीजिये.... मैं देख रहा था की ये दोनों युवक मेरी बातों को धयान नही दे रहें हैं .... मैंने उनसे पूछा की आप लोग कौन हैं और क्या करते हैं ..... उनमे से एक ने जवाब दिया की मेरे पिताजी पुलिस में हैं .... फिर पूछा कि रिक्से वाले कि गलती क्या है ? ... उसने तैस में कहा कि रिक्से वाले ने अपना रिक्सा तेजी से लाकर मेरे गाड़ी में सटा दिया..... मैं थोड़े देर चुप रहा ,फ़िर पूछा कि गाड़ी में रिक्सा सटाने के कारण आप लोगों ने उसे बेरहमी से पिटा .....? यानी कि आपके पिताजी नॉएडा पुलिस में हैं तो कानून आप अपने हाथ में ले लेंगें ....? इतना कहा ही था कि महासय लोग गरम होने लगे ... तब-तक कुछ लोग और मेरा साथ देने लगे .... तभी अचानक रिक्सा वाला रोते हुए कहने लगा ...'साहब मेरा क्या है मैं चाहे जीवित रहूँ या ना रहूँ ..तिलतिल कर तो मरना ही है ... क्योंकि कानून भी हम जैसे लोगों को मार कर अपने मजबूती का दावा करता है ।' मुझे इस बात का ज्यादा दुःख नही था कि एक रिक्सा वाला मारा जा रहा है । क्योंकि ऐसी घटनाएँ तो रोज देखने के लिए मिलतीं हैं । दुःख इस बात की है कि जैसे राजनेताओ के लड़के अपने आप को सर्वोपरि समझकर कुछ भी करते हैं , कोई रोक -टोक नही होता । वैसे ही पुलिस वालों के लड़के भी कानून को अपने हाथ में लिए घूम रहें हैं ? दूसरी बात ... रिक्से वाले ने जो बात कही वह सौ फीसदी सही है ..... जो हमारे देश कि प्रशासनिक ढांचा की वास्तविकता को बताता है .... सत्येन्द्र mcrpv भोपाल

Tuesday, February 19, 2008

शुरु हो गया ताज महोत्सव-2008

पर्यटन की राजधानी मे दस दिवसीय ताज महोत्सव शुरु हो गया है। रविवार की शाम उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राजेश्वर ने शील्पग्राम मे दीप जलाकर इस महोत्सव का आगाज़ किया। महोत्सव के दौरान हर शाम देश विदेश के जाने-माने कलाकार शिल्पग्राम के मुक्ताकाशी मंच पर अपना जलवा दिखाऐगें। इस महोत्सव मे शिल्पग्राम को पारम्परिक तरीके से सजाया जाता है। यहां देश के कोने-कोने से शिल्पी और हस्त शिल्पी अपने स्टाल लगाते हैं। हालांकि इस बार अभी तक शिल्पग्राम मे व्यवस्थायें पूरी नही हो सकीं हैं। इस महोत्सव का मज़ा लेने के लिये आप कभी भी आगरा जा सकते हैं। इसमे होने वाले कार्यक्रम इस प्रकार हैं.......
01। 18-02-2008 इस्माइल दरबार नाइट
02। 19-02-2008 गुलाम अली नाइट
03। 20-02-2008 बांसुरी वादक प. हरि प्रसाद चौरसिया
04। 21-02-2008 ब्रिटिश पुलिस सिंफनी ऑर्केस्ट्रा
05। 22-02-2008 आतिफ असलम (पाकिस्तान) नाइट
06। 23-02-2008 अ. कवि सम्मलेन
ब. कुनाल गांजावाल और वसुन्धरा नाइट
07। 24-02-2008 अ. ऑल इण्ड़िया मुशायरा
ब. सा रे गा मा के मौली और हरप्रीत नाइट
08। 25-02-2008 सोनू निगम नाइट
09। 26-02-2008 हिमेश रेशमिया नाइट
10। 27-02-2008 आशा भोंसले नाइट

Monday, February 18, 2008

झूठ

कितने सवालो का अम्बार क्यों? कब? केसे? उफ़..... कंहा और केसे समेटू किस सिरे को पकड़ किस ओर तह मोडू हाँ .... सिमट तो जायेगा ओर सहज भि पर कबतक ऐसे झूठ को नापू कीर्ती वैदया

Saturday, February 16, 2008

समर

मैं लड़ रहा हूँ लगातार वर्षो से हज़ार मैं ...... तुमसे नहीं उससे नहीं दोस्तों से दुश्मनों से अन्जानो से परिजनों से किसी से नही मैं लड़ रहा हूँ झगड़ रहा हूँ कभी झुकता तो कभी अकड़ रहा हूँ पर मैं तुम लोगों से नहीं ख़ुद से लड़ रहा हूँ कभी अपने सुख कभी दुःख कभी खुशी कभी गम कहीं हारने का डर तो कभी अपना अहम् कभी तुम्हारे प्रति अपने स्नेह कभी यह नश्वर देह कभी तुम्हे खोने के भय से तो कभी ख़ुद पर विजय से किसी के नहीं ख़ुद अपने सर पड़ रहा हूँ मैं ख़ुद से ही लड़ रहा हूँ कभी अपने ईश्वर से कभी अन्दर के शैतान से और शायद कभी कभार अपने भीतर के इंसान से अपने मिथ्या अभिमान को मारने को कभी निराशा हताशा उतारने को कभी अपनी बुराइयों कभी अच्छाइयो से नाराज़ तो तुम पर हूँ पर ख़ुद पर बिगड़ रहा हूँ मैं ख़ुद से ही ........... (कहीं न कहीं यह हम सबकी कहानी है ! ) mailmayanksaxena@gmail.com

Friday, February 15, 2008

अजीब बात

हाँ, अजीब ही लगा आज, जब देखा किसी ने मेरे घर का दरवाजा खटखटाया । जान न पहचान फ़िर भी अपनी बहना बनाया ।

बे-वजह हमारा रोज़ हाल चाल पूछा, बड़ी फुरसत से हमारे साथ चाय का प्याला थामा ।

एक दिन हमने यूँही कह दिया भाई अपने जो टोपी पहनी है, यह किसी ओर के सर पर मैंने देखि है। लो, हो गए वो शुरू.....अंडे क्या, पडे हमे दुनिया जहाँ के डंडे....कमाल की बात तों यह की हमे दुनिया का सबसे बड़ा "भ्रमित इंसान " के नाम से नवाजा। हम पर नकारा ओर फालतू का इल्जाम डाला।

उनकी इस हरक़त से हमने मोहल्ला क्या अपना बचपन का शहर भी त्यागा।

लेकिन हद तब पार हुई जब फ़िर एक दिन उन्हे अपना दरवाजा खटखटाते पाया। दांत उनके बहार, वही बेरहम मासूम हँसी छलका वो बोले " दीदी, छोटे भाई को माफ़ी न दोगी , छोडो, अब वो पुरानी बात ....नए घर ओर शहर में हमे चाय नही पूछेंगी।

हमारी तों जान निकल गई क्या अब यह हमसे चाहते है ..खेर अपने ज़स्बतो को दबा हमने पूछा, भाई जी हमारा पता आपको किधर से मिला ?

बड़ी नमर्ता से फ़िर हमारे भाई बोले हम दीदी अब आपके ही शहर में शिफ्ट हो गए है ओर इश्वर के कृपा से आज फ़िर आपके पड़ोसी बन गए है। जैसे ही हमने पड़ोस के दरवाजे पर नज़र दौडाई आपके नाम के नेम प्लेट पाई, तुरंत समझ गए अपनी प्यारी बहना का घर है , फ़िर काहे के शर्म ओर बजा दी घंटी।

अब तक हम समझ गए थे फ़िर बदलना होगा हमे अपना घर, लकिन अबकी बार बस घर ओर मोहल्ला न के शहर ...

कीर्ति वैद्य....

सुरक्षा अस्त्र

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