Friday, February 15, 2008
ये कैसी पत्रकारिता ...?
आज सुबह जब मैं अपने ऑफिस पहुँचा ... मैंने देखा की एक न्यूज़ चैनल ज़ोर -ज़ोर से चिल्ला रहा था कि शाहरुख खान का क्रेडिट कार्ड चोरी हो गया ... ब्रेकिंग न्यूज़ - तीन लोग हिरासत में । ..... मुझे समझ में नही आ रहा है कि हमारे वरिष्ठ पत्रकार क्या जताना चाहते हैं ..... या तो अपनेआप को सर्वोपरि मान चुकें हैं ... या तो दिमागी रूप से दिवालिया हो चुकें हैं ? मैं जहाँ भी जाता हूँ ..... लोगों को यह कहते हुए पाता हूँ कि पत्रकारिता मदारियों का समूह है। आज कोई भी समर्पित पत्रकार अपने को पत्रकार बताना नही चाहता है ? यही दशा रहा तो आने वाले समय में पत्रकारों की जो दशा होगी .... उसकी कल्पना आज की परिदृश्य से लगाया जा सकता है ।
Thursday, February 14, 2008
क्या तमाशा ही देखना चाहते हैं दर्शक
आज सुबह जब ऑफिस पंहुचा तो टीवी पर एक नया तमाशा देखा प्यार के इज़हार का। वेलन्टाइन डे के मौके पर राखी सांवत के घर पंहुचा उनका आशिक अभिषेक गुलाब का गुलदस्ता लेकर... और माफी मांगने पर उसे मिले तमाचे... ये थी देश मे आज की सबसे बड़ी ख़बर। और मेरे जैसे कई टीवी पत्रकारों अपने कैमरों से लैस होकर इस तमाशे को कैद कर रहे थे। सारे चैनल्स की ब्रेकिंग न्यूज़ थी राखी और अभिषेक के बीच का ये तमाशा। हर कोई इसे अपने ही अन्दाज़ मे दिखाकर ज़्यादा से ज़्यादा टीआरपी बटोरने की फिराक मे लगा हुआ था............ मैं सोच रहा था क्या यही पत्रकारिता का असली मकसद है? क्या हम सिर्फ इसी तरह की बेमतलबी ख़बरों के लिये काम कर रहे है? इस सवाल का जवाब मुझे पता है नही। लेकिन खेल टीआरपी का है जो कुछ भी करने को मजबूर कर सकता है कुछ भी.........
पत्रकारिता के अपने दस साल के सफर में मैने कई पड़ाव देखें हैं। बदलते देखा ख़बरों को... हमारी प्राथमिकता को... और कहीं ना कहीं खुद को भी.. जैसे हम आत्मसर्मपण करते जा रहे हैं केवल टीआरपी की खातिर... पांच साल तक देश के सर्वश्रेष्ठ न्यूज़ चैनल मे काम किया। और ये बदलाव करीब से देखा कि आज के इस दौर मे राखी सावंत जैसे लोग ही हमारी प्रथिमकता है भले ही देश के किसी कोने मे कोई परिवार भूख से तड़प कर मरता रहे। हमे हास्य से भरपूर फूहड़ता परोसते शो दिखाने ज़रुरी हैं भले ही लाखों लोग बिना पानी और सड़कों के ज़िन्दगी गूज़ार रहे हों। देश की राजधानी के करीब ही ऐसे कई गांव मौजूद है जहां आज तक लोग मिट्टी के घरों मे रहने को मजबूर हैं लेकिन हमारे लिये उन्हे दिखाने के बजाय ये दिखाना ज़रुरी है कि कौन सी हिरोईन ने रैम्प पर कम कपड़े पहन कर कैटवॉक किया। किसने बनाया आलिशान बंगला। किस के बीच चल रहा है अफेयर और ना जाने क्या क्या......... जब भी इस बारे मे कोई पूछता है तो हम कहतें है कि क्या करें दर्शक यही देखना चाहते है। ये सवाल हम सब के लिये अहम है कि क्या वाकई हमारे दर्शक यही देखना चाहते हैं? मै यही सवाल अपने सब साथियों और दर्शकों से पूछना चाहता हूँ.... उम्मीद है आप सभी जवाब ज़रुर देगें कि आप क्या देखना चाहते हैं?
वेलेन्टाइन दिवस
ये दिन है सुर्ख गुलाबों का
ग्रीटिंग्ज का और चॉकलेटों का
दिल की बातों को कहने का
मन भावन के संग रहने का ... हो हो हो हो
आज जोडियाँ मिलतीं है भैया
नही चढता कोई भी सीढियाँ
उडते हैं सब अस्मानों में
पाँव टिकते नहीं मैदानों में...
दिलवर के लिये दिलदार हैं ये
दुश्मन के लिये भी प्यार हैं ये
यहाँ मेले ठेले लगते हैं
और प्यार के प्याले छलकते हैं
बाज़ार बनती पत्रकारिता
"तुम हर कीमत पर सच को लोगों तक पहुँचाना, सच सच और कोवल सच, सच के सिवा कुछ नहीं,अगर उस सच से कभी तुम्हे समझौता करना पड़े, अपनी आत्मा से समझौता, तो मरना श्रेयस्कर समझना बजाय झुकने के।"
समय बदला और साथ ही पत्रकारिता भी और उसकी मांग भी
अब जनाब आप भरे बाज़ार में खड़े है जहाँ हर चीज़ बिकती है।
ईमान भी और इंसान भी। शायद एक बिज़नेस मैन के लिए ये कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन एक पत्रकार के लिए इससे हेय शायद ही कुछ हो।
ऊपर लिखी पंक्तियां श्री गणेश शंकर विद्यार्थी की हैं, एक पत्रकार की ।
समय आ गया है चयन आपको करना है कि हमारा न्यूज़ सेन्स राखी सावंत को न्यूज़ मानता है या एक अरब की जनसंख्या वाले देश में सड़कों पर रहने वाले हज़ारों भूखे बच्चों को जिन्हे एक व़क्त की रोटी भी नसीब नहीं।
Wednesday, February 13, 2008
कहाँ है देश ....?
महाराष्ट्रा में हो रहे आतंक से तो सभी लोग परिचित ही होंगे... उत्तर भारतीय उनके आंखों का कांटा बने हुए हैं.... राज अपने राजनीति की रोटी सेंकने के लिए तवा गरम करने का प्रयास कर रहे हैं ... राजनेताओं में वाक् युद्ध चल रही है । मुलायम , मायावती , लालू , रामविलास पासवान तथा अन्य उत्तर भारतीय नेता गण तथाकथित रहनुमा बने हुए है .... संविधान की बात करें तो सभी भारतीय नागरिक को अबाध रूप से देश के किसी भी कोने में घुमाने , रहने , व्यवसाय कराने तथा संगठन बनाने के लिए अनुमति देता है । लेकिन संविधान को कौन मानता है ? नैतिक कर्तव्य को कौन मानता है , कानून तो हाथ में रहता है ...जिसको जैसे मर्जी इस्तेमाल कर रहा है .... किसी पर कोई लगाम नही है ?
राज जो कर रहें है वह ठीक नही है ... लेकिन प्रश्न उठता है कि उत्तर भारतीय नेता अपने प्रदेश में क्या कर रहे हैं .... ? जातिवाद का ज़हर घोल कर लोगों को आपस में लड़ा रहें है...... जाति पर आधारित राजनीति कर रहे है .... धर्म और जाति नेताओं का चुनावी मुद्दे होतें हैं... विकास का मुद्दा नगण्य होता है ..... सामाजिक सरोकारों की तिलांजली चढाना इन नेताओं की नियती हो गई है.... सत्ता पाने के पहले और सत्ता पाने के बाद की स्थिति में कोई अन्तर नही होता है...
महाराष्ट्र हो चाहें उत्तर प्रदेश ,बिहार या बंगाल हर जगह किसान आत्महत्या कर रहें हैं ... लेकिन कोई भी राजनेता इन मुद्दों को नही उठाता है... ? हमारा देश विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है... विकास दर
8 प्रतिशत से ऊपर है... हम आधुनिकता का चोला ओढे अपने मुँह मिया मिठ्ठू बन रहें हैं .... लेकिन वास्तविकता कुछ और है ..जो देश वाशियों से छुपा नही है ... भ्रष्टाचार , बेरोजगारी , अशिक्षा , भूखमरी आज भी हमारे देश की पहचान बनी हुई है । पता नही देश का भविष्य क्या होगा ? जातिवाद , धर्मवाद , क्षेत्रवाद , भाषावाद रूपि नाग को ये नेतागण कबतक दूध पिलाते रहेंगे ? आज हर आम भारतीय नागरिक इस सोच में है की कहाँ है हमारा देश ?
Tuesday, February 12, 2008
मैं तो....... क्योंकि मैं किसान हूँ ....
नेताजी पूछे तुम कौन हो ....?
मैं बोला , मैं इन्सान हूँ ....
क्या तेरे पास गाड़ी है ...?
हाँ मेरे पास बैलगाडी है ....
नेताजी, वैश्वीकरण के इस युग में बैलगाडी.... ?
हाँ , ये भारत की सवारी है ...
नेताजी , अरे ! मैं तो सस्ते दर पर क़र्ज़ की व्वस्था किया है ... ?
हाँ , इसीलिए मोतिया ने आत्महत्या किया है .... ?
नेताजी , आत्महत्या ? ये जरूर विपक्षी पार्टी की चाल है...?
मैं , नहीं ! यह तो आपके कमीशन का कमाल है ....?
नेताजी , चलो ठीक है.... अब बताओ तुम्हारे घर क्या -क्या है...?
मैं , जानवरों के गोबर से जलाता हूँ चूल्हा
मिटटी का घर है लेकिन छत है खुला
पानी इतना है ? कि बस हो पाता है कुल्ला
खाने में सुखी रोटी और नसीब से दाल का दूल्हा ...?
मैं तो दबा , कुचला एक इन्सान हूँ ......
....... क्योंकि मैं भारत का किसान हूँ ...?
सत्येन्द्र
mcrpv भोपाल
Monday, February 11, 2008
गोवा मेरे चश्मे से -भाग १
घूमने के लीए हमने किराये की बाईकस ली...ओर चल पड़े शहर घूमने...सबसे पहली नज़र वंहा बने घरो में गयी ...सुंदर छोटे -छोटे घर जो केले ओर नारियल पेडो से घिरे थे।
खैर, हमारा पहला पड़ाव सेंट फ्रांसिस चर्च था, जो सबसे पुरानी ओर मान्य चर्च है, यंहा मोमबत्ती ज़ला जो भी मांगे, पूरा होता है , ऐसा मुझे एक स्थानिये निवासी ने बताया ।
वैसे तों हर मोड़ पर एक चर्च है ओर हर चर्च के बनावट दूसरी चर्च से अलग है, लेकिन सच मुझे सेंट फ्रांसिस चर्च में शांति का अनुभव हुआ । इस चर्च में फादर फ्रांसिस कि मृत देह संभाल कर ज्यूँ की त्युं रखी गयी है ।
सेंट फ्रांसिस चर्च
बाहरी और भित्री दृश्य

अगले भाग में पढे गोवा के फोर्ट अगोढा , समुंदरी तट और होटल्स व खानापीना , शॉपिंग....
कीर्ती वैद्य ...
हाईटेक प्यार का मौसम
मौसम प्यार का हो गया हाईटेक
प्रेम की भाषा मैसेजिंग , चैटिंग और मेल
अब बादल नहीं ले जाते संदेश
पत्र की भेष में एस एम एस
जज़्बात नही जिस्म बोलते हैं
सिर्फ जिस्म नहीं ! दिल रोज बदलते हैं
वे दिन थे जब प्रेमिका देती थी काढायीदार रुमाल
जिसमें होता था प्यार का अलग खुमार
कूल है हम फिर भी फूल है ?
क्योंकि , आत्मीयता ,आवेग और प्रतिबद्धता की बत्ती गुल है ।
Saturday, February 9, 2008
खुदा बचाये
मुझको बुला के घर में पूछें वो आप क्या हैं
कोई मुझे बताये ये दुआ, सलाम क्या है ।
मैने तो अपना मान कर जाने की की थी जुर्रत
बेगाना वो बना कर पूछें कि नाम क्या है ।

मै सोच कर गया था होगी मेहमाँ नवाज़ी
अनजान बन वो पूछे मुझसे कि काम क्या है ।
इस बेरुखी ने उनके किया दिल को कितना घायल
मेरा दिल ही मुझसे पूछे उनका पयाम क्या है ।
उफ़ दोस्ती से ऐसे बेज़ार हो गये हम
उनसे खुदा बचाये जिन्हे कत्ले आम क्या है ।
कोई मुझे बताये ये दुआ, सलाम क्या है ।
मैने तो अपना मान कर जाने की की थी जुर्रत
बेगाना वो बना कर पूछें कि नाम क्या है ।

मै सोच कर गया था होगी मेहमाँ नवाज़ी
अनजान बन वो पूछे मुझसे कि काम क्या है ।
इस बेरुखी ने उनके किया दिल को कितना घायल
मेरा दिल ही मुझसे पूछे उनका पयाम क्या है ।
उफ़ दोस्ती से ऐसे बेज़ार हो गये हम
उनसे खुदा बचाये जिन्हे कत्ले आम क्या है ।
Friday, February 8, 2008
परवेज़ सर बनें बेस्ट क्राइम रिर्पोटर ऑफ दि ईयर
आप सभी जानते हैं कि हमारे परवेज़ सागर सर को मीड़िया जगत के प्रतिष्ठित नेशनल मीड़िया एक्सीलेन्स अवार्ड़ के लिये नामित किया गया था। आपको जानकर खुशी होगी कि गुरुवार की शाम फिक्की ऑडीटोरिमय मे आयोजित दूसरे मीड़िया एक्सीलेन्स अवार्ड़ फंक्शन मे परवेज़ सागर सर को क्राइम श्रेणी मे बेस्ट रिर्पोटर ऑफ दि ईयर अवार्ड़ से सम्मानित किया गया। ये पुरुस्कार उन्हे केन्द्रीय मंत्री मंगत राम सिंघल और झारखण्ड़ के मुख्यमंत्री मधु कोड़ा की उपस्थिति मे राजस्थान के गृहमंत्री गुलाब चन्द कटियार ने प्रदान किया। इस श्रेणी मे देशभर के 39 टीवी पत्रकारों को नामित किया गया था। ये अवार्ड़ परवेज़ सागर सर को 2007 मे आज तक पर दिखाई गयी ज़हरीली सब्ज़ियों वाली सनसनीखेज़ खंबर के लिये दिया गया। इस ख़बर के प्रसारण के बाद दिल्ली सरकार ने कई लोगों के खिलाफ कार्यवाही की थी। गौरतलब है कि इसी ख़बर के लिये परवेज़ सर को वर्ष 2007 मे ही ईएम बेस्ट रिर्पोटर ऑफ दि ईयर अवार्ड़ से सम्मानित किया जा चुका है। दस वर्षों से पत्रकारिता कर रहे परवेज़ सागर जी इससे पहले भी अपनी कई ख़बरों के लिये सुर्खियों मे बने रहें। जिसमें ताज कॉरिड़ोर, आगरा-अलीगढ के दंगे, मथुरा मे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के रिश्तेदार की ट्रेन से फेंककर हत्या और उत्तर प्रदेश के लखनऊ विकास प्राधिकरण का भूमि आवन्टन घोटाला जैसी कई बड़ी ख़बरें शामिल है। उनकी इस उपलब्धि पर उनके सिखाये गये छात्र ही नही बल्कि उनके साथ काम कर चुके और काम कर रहे सभी लोगों मे गौरव की अनुभूति है। देशभर के सभी पत्रकारों और रंगकर्मीयों की और से परवेज़ सर को हार्दिक बधाई....... हम सभी उनके उज्जवल भविष्य की कामना करतें है।
Wednesday, February 6, 2008
ऐ रंगरेज .....
ऐ रंगरेज .....
सब रंग हैं न तेरे पास .......
भर दो पीत मेरे बचपन को
बाबुल के संग जब मैं रहती हूँ
इठलाती इत उत जब फिरती हूँ
रोती माँ है मैं जब गिरती हूँ
फिर बाबु जी की गोदी होती हूँ
ऐ रंगरेज .....
भर दो नील मेरे अल्हर्पण को
जब मैं तितली सी उड़ती हूँ
ले बलाएँ दादी कहती है
कैसी सुंदर नील परी हूँ
ऐ रंगरेज .....
भर दो गुलाबी मेरे यौवन को
जब मैं यादों का पनघट हूँ
टूटे फूटे सपनों का अम्बर हूँ
धुंधली भूली टूटी खंडहर हूँ
ऐ रंगरेज .....
हर लो न यह कला रंग
मैं फिर जीना चाहती हूँ
वह बचपन के छोटे मोटे पल
जब दुनिया अच्छी है मैं भोली हूँ .....
ऐ रंगरेज .....
दे दो न मुझको यह हरा रंग
बोलो न .....
क्या दोगे मुझको अपना इन्द्रधनुष ...
ऐ रंगरेज .....
कीर्ती वैद्य
Monday, February 4, 2008
इस कदंब की डाली पर
इस कदम्ब के डाली पर
डलता था कभी हिंडोला
बैठा करती थी राधा
और मोहन देते झूला

फिर बजती सुरीली बंसी
गूँजे था मधुबन सारा
नाचती गोपियाँ झूमझूम
और ब्रज थिरकता प्यारा
रात चांदनी में होती थी
जब यहाँ रास की लीला
तब यमुना भी किलोल करती
मचलती बहती सलिला
रूठ मनव्वल चलती थी जब
राधा और कान्हा की
सारा गोकुल जुगत भिडाता
दोनों के मधुर मिलन की
होता फिर मिलन का उत्सव
और मधुबन सारा गाता
और कन्हैया मुरली मनोहर
भूलते विश्व की चिंता
डलता था कभी हिंडोला
बैठा करती थी राधा
और मोहन देते झूला

फिर बजती सुरीली बंसी
गूँजे था मधुबन सारा
नाचती गोपियाँ झूमझूम
और ब्रज थिरकता प्यारा
रात चांदनी में होती थी
जब यहाँ रास की लीला
तब यमुना भी किलोल करती
मचलती बहती सलिला
रूठ मनव्वल चलती थी जब
राधा और कान्हा की
सारा गोकुल जुगत भिडाता
दोनों के मधुर मिलन की
होता फिर मिलन का उत्सव
और मधुबन सारा गाता
और कन्हैया मुरली मनोहर
भूलते विश्व की चिंता
मैंने गांधी को मारा है !
गांधीजी की पुण्यतिथि पर उनको शायद हम सबने याद किया, कुछ को याद था कुछ को याद दिला दिया गया। अच्छा लगा कि कम से कम हमारी ज़िम्मेदार ( तथाकथित ) मीडिया इस दिन को नही भूली। वैसे कई चैनल दूरदर्शन देख कर जगे होंगे, दूरदर्शन को बधाई किसी काम तो आया ....... कुछ निजी चैनल भी तैयारी के साथ आये जैसे एन डी टी वी और समय को बधाई ! एन डी टी वी देखते पर कुछ विचार फिर से उठे और शब्दों की शक्ल अख्तियार कर ली ! गांधी की प्रासंगिकता पर सवाल और जवाब की ही उलझन में पड़े हम सब हिन्दोस्तानी शायद यही सोचते हैं !
मैंने गांधी को मारा है !!
मैंने गांधी को मारा है .....
हां मैंने गांधी को मार दिया !!
मैं कौन ?
अरे नही मैं कोई नाथूराम नहीं
मैं तो वही हूँ जो तुम सब हो
हम सब हैं
क्या हुआ अगर
मैं उस वक़्त पैदा नही हो पाया
क्या हुआ अगर
गांधी को मैं सशरीर नही मार सका
मैंने वह कर दिखाया
जो नाथू राम नही कर पाया
मैंने गांधी को मारा है
मैंने उसकी आत्मा को मार दिखाया है
और मेरी उपलब्धि
कि मैंने गांधी को एक बार नही
कई बार मारा है
अक्सर मारता रहता हूँ
आज सुबह ही मारा है
शाम तक न जाने कितनी बार
मार चुका हूँगा
इसमे मेरे लिए कुछ नया नहीं
रोज़ ही का काम है
हर बार जब अन्याय करता हूँ
अन्याय सहता हूँ
सच छुपाता झूठ बोलता हूँ
घुटता अन्दर ही अन्दर मरता हूँ
अपने फायदे के लिए
दूसरे का नुकसान करता हूँ
और उसे
प्रोफेश्नालिस्म
का नाम देकर बच निकलता हूँ
तब तब हर बार
हाँ मैंने गांधी को मारा है ........
जब जब यह चीखता हूँ कि
साला यह मुल्क है ही घटिया
तब तब ......
जब भी भौंकता हूँ कि
साला इस देश का कुछ होने वाला नही
और
जब भी व्यंग्य करता हूँ कि
अमा यार ' मजबूरी का नाम .........'
तब तब हर बार
मैंने उसे मार दिया
बूढा परेशान न करे हर कदम पर
आदर्शो के नखरों से
सो उसे मौत के घाट उतार दिया
तो आज गीता कुरान
जिस पर कहो हाथ रख कर
क़सम खाता हूँ
सच बताता हूँ कि
मैंने गांधी को मारा है
पर इस साजिश में मैं अकेला नहीं हूँ
मेरे और भी साथी हैं
जो इसमे शामिल हैं और
वो साथी हैं आप सब !!
बल्कि हम सब !!!!
यौर होनौर आप भी ......
अब चौंकिए मत
शर्मिन्दा हो कर चुप भी मत रहिये .......
फैसला सुनाइये
मेरा कातिल ही मेरा मुंसिफ है !!!!!!!
हाँ दो मुझे सज़ा दो
क्यूंकि मैंने गांधी को ....................
- मयंक सक्सेना
mailmayanksaxena@gmail.com
Saturday, February 2, 2008
विज़न २०२०
हरी नीली
लाल पीली
बड़ी बड़ी
तेज़ रफ़्तार भागती मोटरें
और उनके बीच पिसता
घिसटता
आम आदमी
हरे भरे हरियाले पेडों
के नीचे बिखरी
हरी काली सफ़ेद लाल
पन्नियाँ
और उनको बीनता
बचपन
सड़क किनारे चाय
का ठेला लगाती
वही बुढ़िया
और
चाय लाता
वही छोटू
बडे बडे
डिपार्टमेंटल स्टोरों
में पाकेट में सीलबंद
बिकता किसान
भूख से
खुदकुशी करता
पांच सितारा अस्पताल
का उद्घाटन करते प्रधानमंत्री
की तस्वीर को घूरती
सरकारी अस्पताल में
बिना इलाज मरे
नवजात की लाश
इन सबके बीच
इन सबसे बेखबर
विकास के दावों की होर्डिंग्स
निहारता मैं
और मन में दृढ करता चलता यह विश्वास
कि हां २०२० में
हम विकसित हो ही जाएँगे
दिल को
बहलाने को ग़ालिब ....................
परवेज़ सर को शुभकामनाऐं........
आप सभी को जानकर खुशी होगी कि हमारे प्रिय सर परवेज़ सागर जी को नेशनल मीड़िया एक्सिलेंस अवार्ड के लिये नामित किया गया है। यह अवार्ड़ समारोह सात फरवरी को दिल्ली के फिक्की ऑड़ीटोरियम मे मीड़िया फेडेरेशन द्वारा आयोजित किया जा रहा है। इस समारोह मे देशभर के जाने-माने पत्रकारों और टीवी पत्रकारों को उनकी ख़बरों के लिये सम्मानित किया जायेगा। गौरतलब है कि वर्ष 2007 मे श्री सागर को "आज तक" पर ज़हरीली सब्ज़ियों का खुलासा करने के लिये ईएम बेस्ट रिर्पोटर ऑफ दी ईयर अवार्ड़-2007 से सम्मानित किया जा चुका है। इस ख़बर ने राजधानी समेत पूरे देश मे लोगों को बेची जा रही ज़हरीली सब्ज़ियों का पर्दाफाश किया गया था। परवेज़ सर को रंगकर्मी परिवार की ओर से ढेरों शुभकामनाऐं। हम सभी उनके उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं।
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