रंगकर्मी परिवार मे आपका स्वागत है। सदस्यता और राय के लिये हमें मेल करें- humrangkarmi@gmail.com

Website templates

Tuesday, December 16, 2008

"द्रष्टि"

"द्रष्टि"
अनंतकाल से ये द्रष्टि प्रतीक्षा पग पर अडिग ,
पलकों के आंचल से
सर को ढांक ,
आतुरता की सीमा लाँघ
अविरल अश्रुधारा मे
डूबती , तरती , उभरती ,
व्याकुलता की ऊँचाइयों को छु
प्रतीक्षाक्षण से तकरार करती
तुम्हारी इक आभा को प्यासी
अनंतकाल से ये द्रष्टि
प्रतीक्षा पग पर अडिग

4 comments:

मुसाफिर जाट said...

बहुत खूब

नारदमुनि said...

najar ne najar se mulakaat karli,khamosh the dono magar bat kar li, ishk kee kheti ko jab sukha dekha to aankhon ne ro ro kar barsat kar li.narayan narayan

धीरेन्द्र पाण्डेय said...

bahut sundar hai likhte rahiye ..

पुरुषोत्तम कुमार said...

अच्छी रचना।

सुरक्षा अस्त्र

Text selection Lock by Hindi Blog Tips