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Thursday, September 25, 2008

सदा-ऐ-हिंद

मेरा मुल्क मेरा वतन गुलसितां था

वो पिछले दिनों था बदला हुआ सा

यहाँ राम भी थे

अयोध्या बसा था

ये बंजर बियाबां

ये किसका गुमां था

ये नानक की भूमि

यशोदा की बेटी

खड़ी बीच चकले

सदाएं हैं देती

ये गांधी के शव हैं

ये बिस्मिल की लाशें

मरे सारे इकबाल

किसको तलाशें

मेरा मुल्क मेरा वतन हिन्दोस्तां

बचा लो इसे ये तुम्हारा गुलसितां

2 comments:

manvinder bhimber said...

मेरा मुल्क मेरा वतन गुलसितां था

वो पिछले दिनों था बदला हुआ सा


यहाँ राम भी थे

अयोध्या बसा था

ये बंजर बियाबां

ये किसका गुमां था
bahut sunder

Mrs. Asha Joglekar said...

Sunder. Bachalo ise ye tera hai Gulistan.

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