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Saturday, March 14, 2009

फैसला जान के रहिये ।

अब इस बेरुखी को क्या कहिये वो हैं क्यूं चुप, जरा पता करिये हमनें अब किया है ऐसा क्या खफा खफा से आप क्यूं रहिये । हम न समझे न कुछ उन्होने कहा ऐसे हालात हैं कि क्या करिये गलतफहमी का शिकार है दोनों चुप की दीवार तोड के रहिये । बिना गलती के सजा क्यूं काटें जो भी है खुल के बात तो करिये पार इस रहें या हों उस पार फैसला आज जान के रहिये

2 comments:

MARKANDEY RAI said...

बिना गलती के सजा क्यूं काटें
जो भी है खुल के बात तो करिये .....
nice feelings...

नारदमुनि said...

galat fahami bade bade gahare riston ko tod deti hai, iskliye galat fahami ko turant tod dena chahiye. bahut sundar likha. narayan narayan

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