अनूप मंडल जी,
आप ने सही बात उठाई है , हिंदुत्ववादी शक्तियां यदि किसी का पुतला जलने की ख़बर सुन ले तो उसका घर फूँक देंगी उसको जिन्दा जला देंगी, ये हिन्दुत्वादी शक्तियों का एकाधिकार है । जिसमें इन अराध्य देवो क मानने वालो का कोई बस नही है । हिन्दुत्वादी शक्तियों ने सभी देवी देवताओं को ब्रांड़ के रूप में तब्दील कर दिया है , बीडी से लेकर सभी चीजो पर ,देवी देवताओं के चित्र बना कर व्यापार कर रहे है । इनके राजनीतिक लोग मर्यादा पुरषोत्तम राम को राजनीति का ब्रांड बनाये हुए है, दुर्गा जी को ब्रांड बनाये हुए है और बाबरी मस्जिद ध्वंश करके इन लोगो ने मर्यादा पुरषोत्तम राम को अपमानित किया है, पुन: वनवास दिया है। आपके शब्दों में यह राक्षस है, दुष्ट है । पहले यह ब्रिटिश साम्राज्यवाद से पोषित होते थे और अब अमेरिकन साम्राज्यवाद से इनके तनखैया पत्रकार आए दिन अमेरिका की प्रशंसा में गीत गाते नजर आते है। आपने हमसे पूछा है कि इनके ख़िलाफ़ कार्यवाही हो सकती है या नही, भारतीय दंड विधान की धारा 153 क , 153 ख , 295 क के तहत कार्यवाही सम्भव है जिसमें 3 वर्ष की सजा है । महत्त्वपूर्ण यह नही है कि उनको सजा हो या न हो । महत्वपूर्ण यह है कि उनके दो अर्थी चरित्र को समझना चाहिए । यह सब वही लोग है जिनके मुहँ में राम बगल में छूरी। मौका मिले तो यह लोग वतन बेच देंगे , हमारा तुम्हारा कफ़न बेच देंगे ।
सुमन
loksangharsha.blogspot.com
Monday, October 19, 2009
लो क सं घ र्ष !: अनूप जी हमारा तुम्हारा कफ़न बेच देंगे
अनूप मंडल जी,
आप ने सही बात उठाई है , हिंदुत्ववादी शक्तियां यदि किसी का पुतला जलने की ख़बर सुन ले तो उसका घर फूँक देंगी उसको जिन्दा जला देंगी, ये हिन्दुत्वादी शक्तियों का एकाधिकार है । जिसमें इन अराध्य देवो क मानने वालो का कोई बस नही है । हिन्दुत्वादी शक्तियों ने सभी देवी देवताओं को ब्रांड़ के रूप में तब्दील कर दिया है , बीडी से लेकर सभी चीजो पर ,देवी देवताओं के चित्र बना कर व्यापार कर रहे है । इनके राजनीतिक लोग मर्यादा पुरषोत्तम राम को राजनीति का ब्रांड बनाये हुए है, दुर्गा जी को ब्रांड बनाये हुए है और बाबरी मस्जिद ध्वंश करके इन लोगो ने मर्यादा पुरषोत्तम राम को अपमानित किया है, पुन: वनवास दिया है। आपके शब्दों में यह राक्षस है, दुष्ट है । पहले यह ब्रिटिश साम्राज्यवाद से पोषित होते थे और अब अमेरिकन साम्राज्यवाद से इनके तनखैया पत्रकार आए दिन अमेरिका की प्रशंसा में गीत गाते नजर आते है। आपने हमसे पूछा है कि इनके ख़िलाफ़ कार्यवाही हो सकती है या नही, भारतीय दंड विधान की धारा 153 क , 153 ख , 295 क के तहत कार्यवाही सम्भव है जिसमें 3 वर्ष की सजा है । महत्त्वपूर्ण यह नही है कि उनको सजा हो या न हो । महत्वपूर्ण यह है कि उनके दो अर्थी चरित्र को समझना चाहिए । यह सब वही लोग है जिनके मुहँ में राम बगल में छूरी। मौका मिले तो यह लोग वतन बेच देंगे , हमारा तुम्हारा कफ़न बेच देंगे ।
सुमन
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Sunday, October 18, 2009
लो क सं घ र्ष !: अमेरिकन साम्राज्यवाद का खेल
पाकिस्तान के अन्दर काफ़ी दिनों से आतंकी घटनाएँ बढ़ रही है । आतंकवादियों ने सेना मुख्यालय से लेकर पूर्व प्रधानमंत्री बेजनीर भुट्टो तक की हत्या कर दी है । अब वजीरिस्तान प्रान्त पर पाकिस्तानी सेना के 40 हजार जवान युद्घ के लिए भेजे गए है । मुख्य बात यह है कि तालिबान को अमेरिकी मदद से तैयार किया गया था और उनको तैयार करने में पकिस्तान की सरकार व आई एस आई के दिशा निर्देश थे । इस समय तालिबान के पास 2 लाख अमेरिकी हथियार है । जिसमें ए के सीरीज़ की राईफलें , रॉकेट लॉचर , ग्रेनेड , ई एल सी लाइट मशीन गन है । साम्राज्यवादी शक्तियों ने पहले धार्मिक कट्टरपंथियों को हथियारों से लैश किया और फ़िर ग्रह युद्घ की स्तिथि पैदा कर पूरे पकिस्तान के विकास को रोक दिया है । हमारे देश के अन्दर अमेरिकन साम्राज्यवाद और उसके पिट्ठू इजराइल का हस्तक्षेप बढ़ा है । माले गाँव से लेकर मुंबई आतंकी घटना तक साम्राज्यवादी शक्तियों का ही हाथ रहा है । एक तरफ़ धार्मिक कट्टर समूहों को पनपाने में मद्दद देने का कार्य साम्राज्यवादी शक्तियां शुरू से कर रही है । अभी दीपावली के अवसर पर गोवा में दक्षिण पंथी हिंदू संगठन सनातन' के सदस्य स्कूटर से बम ले जा रहे थे, विस्फोट हो गया और मारे गए । 4 सदस्य गिरफ्तार किए गए है उक्त कट्टर हिंदू संगठन का सम्बन्ध माले गाँव आरोपी साध्वी प्रज्ञा सिंह से है । इन लोगो कि मंशा यह थी कि दीपावली के अवसर पर भीड़ वाले इलाके में विस्फोट करा कर आतंक का माहौल कायम किया जाए । साम्राज्यवादी शक्तियों की कोशिश है कि देश के अन्दर विभिन्न धार्मिक समूहो के कट्टरवादियों को उकसा कर प्रशिक्षण देकर लैश कर ग्रहयुद्ध जैसी स्तिथि कर दी जाए । साम्राज्यवादी शक्तियों का सरकार के ऊपर प्रभाव पड़ा है जैसे पकिस्तान के ऊपर शुरू से साम्राज्यवादी शक्तियों का प्रभाव रहा है और उसकी दुर्दशा हो रही है । हमारा देश ब्रिटिश, फ्रांसीसी , पुर्तगाली आदि साम्राज्यवादी शक्तियों द्वारा शासित रहा है । इन्ही शक्तियों ने देश की प्राकृतिक सम्पदा से लेकर प्रत्येक चीज का शोषण किया है । सम्रज्वादियो की समृद्धि उपनिवेशिक लूट ही होती है । आज की स्तिथियों में अमेरिकन साम्राज्यवादी शक्तियां हमारे देश को कमजोर करके अप्रत्यक्ष रूप से शासित करना चाहती है। जिस में उग्र हिंदू वादी संगठन उनके लिए मददगार साबित हो रहे है इसलिए आवश्यक है की अमेरिकन साम्राज्यवाद का मिलजुलकर मुकाबला किया जाए तभी देश की आर्थिक प्रगति, विकास सम्भव है । साम्राज्यवादी शक्तियों को बगैर परास्त किए देश का विकास सम्भव नही है।
सुमन
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Saturday, October 17, 2009
लो क सं घ र्ष !: शुभ लाभ हमारा दर्शन नही
लोकसंघर्ष परिवार की ओर से सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं ।।
सुमन
loksangharsha.blogspot.com
सभी को दीपावली की शुभकामनाऐं
आज बस दिवाली की शुभकामना ही देना और लेना चाहता था। मगर क्या करूँ,पड़ौस में रहता हूँ इसलिए पड़ौसी पाकिस्तान याद आ गया। पाकिस्तान याद आया तो तालिबान को भी याद करना मज़बूरी थी। जब दोनों साथ हो तो न्यूज़ चैनल्स वाले आधे घंटे की स्पेशल रिपोर्ट दिखाते हैं। हमारी इतनी समझ कहाँ! हम केवल चुटकी बजायेंगे।
---- चुटकी----
बेचारे तालिबान का
इसमे क्या कसूर,
जिसने जो बोया
वह,वही काटेगा
यही तो है
प्रकृति का दस्तूर।
Friday, October 16, 2009
लो क सं घ र्ष !: महानायक का पेट कब भरेगा
फ़िल्म जगत के महानायक अमिताभ बच्चन का नाम देश के महानायकों में से आता है और दुनिया में लाखों लोग उनके प्रशंसक है किंतु इस महानायक का नाम हमेशा आर्थिक घोटालो में भी आता रहता है । नई पीढी इस तरह के दो अर्थी चरित्र से क्या प्रेरणा ले और क्या विश्वाश करे मुख्य बात यह है कि महानायक के परम मित्र अमर सिंह के साथ उनके ख़िलाफ़ जनपद कानपुर के बाबूपुरवा थाने में अपराध संख्या 458/09 अर्न्तगत धारा 420, 467 , 468, 471, 120 बी, आई पी सी, 3/7 मनीलॉण्ड़िरिंग एक्ट व 7/8/9/10/13 भ्रष्टाचार निरोधक कानून कि प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज हुई है । इस मामले में लगभग 300 करोड़ रुपये का घोटाला है । इसके पूर्व भी महानायक अमिताभ बच्चन ने बाराबंकी जनपद के दौलतपुर गाँव में अपने नाम रिकॉर्ड रूम के कर्मचारियों से मिलकर अपने नाम ग्राम समाज कि जमीन फर्जी तरीके से अंकित करा ली थी । महानायक को इस भूमि घोटाले में भी काफ़ी विवाद का सामना करना पड़ा था। यदि वह महानायक न होते साधारण व्यक्ति होते तो कई महीने उनको कई महीने कारागार में रहकर जमानत का इन्तजार करना पड़ता ।
इस तरह कि घटनाएँ देख कर लगता है कि महानायक जैसे लोग शुद्ध रूप से आर्थिक अपराधी है। आर्थिक अपराधियों को सजा देने के लिए सक्षम कानूनों का आभाव है जिसका लाभ उठा कर आर्थिक अपराधी तरह-तरह के अपराध कर देश कि अर्थ व्यवस्था को खोखला करते है । दुखद बात यह है कि इस देश के नवनिर्माण के लिए जो लोग प्रेरणा श्रोत्र हो सकते है । उनकी व्यक्तिगत ज़िन्दगी में इस तरह का आचरण दुखदाई है । अमिताभ बच्चन हालावाद के पर्वतक डॉ॰ हरिवंश राय बच्चन के पुत्र भी है और जब ऐसे लोग इस तरह के कृत्य करते है, तो समाज पर और विशेष कर नई पीढी पर इसका अच्छा प्रभाव नही पड़ता है । गंभीरता से सोचने पर यह सवाल आता है कि इस महानायक का पेट कब भरेगा ?
सुमन
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जो बोया वही काटेंगे
बंगाल की टीवी रिपोर्टर शोभा दास के खिलाफ केस, चंडीगढ़ में प्रेस से जुड़े लोगों को कमरे में बंद किया, जैसी खबरें अब आम हो गई हैं। महानगरों में रहने वाले,बड़ी बड़ी तनख्वाह पाने वाले, ऊँचे नाम वाले पत्रकारों को कोई अचरज इन ख़बरों से हो तो हो हमें तो नहीं है। हो भी क्यूँ, जो बोया वही तो काट रहें हैं। वर्तमान में अखबार अखबार नहीं रहा एक प्रोडक्ट हो गया और पाठक एक ग्राहक। हर तीस चालीस किलोमीटर पर अखबार में ख़बर बदल जाती है। ग्राहक में तब्दील हो चुके पाठक को लुभाने के लिए नित नई स्कीम चलाई जाती है। पाठक जो चाहता है वह अख़बार मालिक दे नहीं सकता,क्योंकि वह भी तो व्यापारी हो गया। इसलिए उसको ग्राहक में बदलना पड़ा। ग्राहक को तो स्कीम देकर खुश किया जा सकता है पाठक को नहीं। यही हाल न्यूज़ चैनल का हो चुका है। जो ख़बर है वह ख़बर नहीं है। जो ख़बर नहीं है वह बहुत बड़ी ख़बर है। हर ख़बर में बिजनेस,सनसनी,सेक्स,सेलिब्रिटी,क्रिकेट ,या बड़ा क्राईम होना जरुरी हो गया। इनमे से एक भी नहीं है तो ख़बर नहीं है। पहले फाइव डब्ल्यू,वन एच का फार्मूला ख़बर के लिए लागू होता था। अब यह सब नहीं चलता। जब यह फार्मूला था तब अख़बार प्रोडक्ट नहीं था। वह ज़माने लद गए जब पत्रकारों को सम्मान की नजर से देखा जाता था। आजकल तो इनके साथ जो ना हो जाए वह कम। यह सब इसलिए कि आज पत्रकारिता के मायने बदल गए हैं। मालिक को वही पत्रकार पसंद आता है जो या तो वह बिजनेस दिलाये या फ़िर उसके लिए सम्बन्ध बना उसके फायदे मालिक के लिए ले। मालिक और अख़बार,न्यूज़ चैनल के टॉप पर बैठे उनके मैनेजर,सलाहाकार उस समय अपना मुहं फेर लेते हैं जब किसी कस्बे,नगर के पत्रकार के साथ प्रशासनिक या ऊँची पहुँच वाला शख्स नाइंसाफी करता है। क्योंकि तब मालिक को पत्रकार को नमस्कार करने में ही अपना फायदा नजर आता है। रिपोर्टर भी कौनसा कम है। एक के साथ मालिक की बेरुखी देख कर भी दूसरा झट से उसकी जगह लेने पहुँच जाता है।उसको इस बात से कोई मतलब नहीं कि उसके साथी के साथ क्या हुआ,उसे तो बस खाली जगह भरने से मतलब है। अब तो ये देखना है कि जिन जिन न्यूज़ चैनल और अख़बार वालों के रिपोर्टर्स के साथ बुरा सलूक हुआ है,उनके मालिक क्या करते हैं। पत्रकारों से जुड़े संगठनों की क्या प्रतिक्रिया रहती है। अगर मीडिया मालिक केवल मुनाफा ही ध्यान में रखेंगें तो कुछ होनी जानी नहीं। संगठनों में कौनसी एकता है जो किसी की ईंट से ईंट बजा देंगे। उनको भी तो लाला जी के यहाँ नौकरी करनी है। किसी बड़े लाला के बड़े चैनल,अखबार से जुड़े रहने के कारण ही तो पूछ है। वरना तो नारायण नारायण ही है।
Thursday, October 15, 2009
लो क सं घ र्ष !: दीपावली के अवसर पर :
राम बनवास से जब लौट के घर में आए
याद जंगल बहुत आया, जो नगर में आये
रक्से दीवानगी आँगन में जो देखा होगा
6 दिसम्बर को श्री राम ने सोचा होगा
इतने दीवाने कहाँ से मेरे घर में आए
जगमगाते थे जहाँ राम के कदमो के निशान
प्यार की कहकशां लेती थी अंगडाई जहाँ
मोड़ नफरत के उसी राहगुजर में आये
धर्म क्या उनका था, क्या जात थी, यह जानता कौन
घर न जलता तो उन्हें रात में पहचानता कौन
घर जलाने को मेरा, लोग जो घर में आये
शाकाहारी है मेरे दोस्त तुम्हारे खंजर
तुमने बाबर की तरफ़ फेंके थे सारे पत्थर
है मेरे सर की खता, जख्म जो सर में आये
पाओ सरजू में अभी राम ने धोये भी न थे
के नजर आए वहां खून के गहरे धब्बे
पाओ धोये बिना सरजू के किनारे से उठे
राम यह कहते हुए अपने द्वारे से उठे
राजधानी की फिजा आई नही रास मुझे
6 दिसम्बर को मिला दूसरा बनवास मुझे
आइये हम आप मिलकर सांप्रदायिक शक्तियों का नाश करने के युद्घ में आगे आयें और जिन लोगो ने हमारे नायक को फिर बनवास दिया है उनका नाश करें ।
दीपावली हमारा महापर्व है । हम आप सबकी सुख और सम्रद्धि की कामना करते है
सुमन
loksangharsha.blogspot.com
Wednesday, October 14, 2009
लो क सं घ र्ष !: कैसे हो दीपावली ?
( चित्र : चर्चा हिन्दी चिट्ठो की से साभार )
असत्य पर सत्य की विजय का त्यौहार दीपावली एक महत्वपूर्ण सामाजिक पर्व है । बाराबंकी में इस वर्ष सरकार की लापरवाही से दो बार घाघरा नदी में कृतिम बाढ़ आ चुकी है । सितम्बर माह में भारत नेपाल सीमा पर बनकशा बाँध का पानी घाघरा नदी में छोड़ दिया गया जिससे लखीमपुर, सीतापुर व बाराबंकी में नदियों का पानी लाखो घरो के अन्दर दो-दो तीन-तीन फ़ुट भर गया । नदियों के किनारे के गावों में दस-दस फीट पानी आ गया और सब कुछ नष्ट हो गया । अब अक्टूबर माह में जो बची-खुची फसलें थी । फिर बनकशा बाँध ने पानी छोड़ा वो बाराबंकी में घाघरा नदी पर बने एल्गिन ब्रिज पर बने खतरे के निशान से 100 सेंटीमीटर अधिक पानी बहना शुरू कर दिया जहाँ कभी भी नदी का पानी नही पहुँचता था वहां भी धान की तैयार फसल उरद, गन्ना सहित सभी फसलें नष्ट हो गई है हजारो गावों में सांप बिच्छी जैसे खतरनाक जानवरों का राज्य हो गया है। काफ़ी लोग सांप काटने से मर रहे है । सड़क मार्ग गोंडा बहराइच रोड कई दिन तक बंद रही हैं । प्रशासन की तरफ़ से माचिस और नमक या थोड़ा अनाज दोनों बार देकर इतिश्री कर ली गई है प्रशासन की ह्रदय हीनता इस बात का प्रतीक है की वह हर साल इस तरह की प्राकृतिक आपदा का इन्तजार करता रहता है और इस तरह की आपदाओ में भी प्रशासन और दलाल लाखो रुपयों का वारा न्यारा करते है इस तरह की बाढ़ के पश्चात नदी के किनारे तटबंधो के बनने की बात उठती है करोडो और अरबो रुपयों के पत्थर कागजो पर आकार तटबंध बन जातें है ,केन्द्र सरकार व प्रदेश सरकार इस समस्या की तरफ़ स्थायी समाधान करने का प्रयाश नही करती है प्राकृतिक बाढ़ का मुकाबला नही किया जा सकता है किंतु कृतिम बाढ़ को रोका जा सकता है लेकिन शासन और प्रशासन की कमी का एक मद ख़तम हो जाएगा इसलिए लाखो करोडो लोगो की जिंदगियों से खेलकर इसका स्थायी समाधान नही किया जाता है । महंगाई के इस दौर में इन क्षेत्रो के लोगो के पास न फसलें बची है और न ही रुपया । भूख की ज्वाला कैसे शांत हो यह यक्ष प्रश्न है जानवरों व पक्षियों के भी खाने के लाले है । अच्छा यह होता की ज्योति पर्व हर साल यहाँ हो तो इसका स्थायी समाधान करना होगा अन्यथा यह यक्ष प्रश्न बना रहेगा की कैसे दीपावली हो ।
सुमन
loksangharsha.blogspot.com Tuesday, October 13, 2009
लो क सं घ र्ष !: सभ्य समाज के ऊपर तमाचा
उत्तर प्रदेश में आतंकवाद के नाम पर फर्जी गिरफ्तारियों को लेकर सरकार ने सेवानिवृत्त न्यायधीश आर. डी. निवेश कमेटी का गठन किया था गिरफ्तारियों की जांच से आतंकवादी फर्जी गतिविधियाँ रुक गयीं तथा फर्जी एनकाउंटर्स भी लगभग बंद से हो गए कचेहरी सीरियल बम्ब विस्फोट कांड के अभियुक्त मोहम्मद खालिद मुजाहिद की गिरफ्तारी 22 दिसम्बर 2007 को बाराबंकी रेलवे स्टेशन पर आर. डी. एक्स व ड़िकोनेटर की बरामदगी के साथ दिखाई गई थी सूचना के अधिकार के तहत 15 सितम्बर 2009 को क्षेत्राधिकारी पुलिस मड़ियाहूँ जिला जौनपुर ने लिखित रूप से सूचना दी है कि 16-12-2007 को शाम 6:30 बजे एस टी एफ द्वारा खालिद मुजाहिद को मड़ियाहूँ बाजार जिला जौनपुर से गिरफ्तार किया था जो अपराधिक मामला बनता है इसलिए आगे की सूचना नही दी जा सकती है । इस तरह से यह पुलिस विभाग ने ही साबित कर दिया है कि खालिद मुजाहिद को 16-दिसम्बर-2007 को मड़ियाहूँ बाजार जिला जौनपुर से गिरफ्तार किया गया था । अब सवाल यह उठता है कि २२ दिसम्बर 2007 को बाराबंकी स्टेशन पर जो गिरफ्तारी दिखाई आर डी एक्स व ड़िकोनेटर के साथ दिखाई गई है वह फर्जी है जब खालिद मुजाहिद एस टी एफ कि अभिरक्षा में था तो किन पुलिस अधिकारियो ने उसके पास आर डी एक्स व ड़िकोनेटर दिखाया और उक्त दोनों बरामदशुदा सामान वह लोग कहाँ लाये यह जांच का महत्वपूर्ण विषय है । निवर्तमान पुलिस महानिदेशक के समय में आए दिन अखबारों में आतंकवाद से खबरें भरी होती थी और हद तो यहाँ तक हो गई थी कि कलकत्ता में चोरी के मामले में निरुद्ध व्यक्ति को लखनऊ में आर डी एक्स सप्लाई करते हुए दिखाया गया था । आज जरूरत इस बात कि है कि निवर्तमान पुलिस महानिदेशक के समय में आतंकवाद के नाम पर गिरफ्तारियां की गई है और एनकाउंटर किए गए है उनकी जांच सरकार को अवश्य करनी चाहिए । जांच इसलिए आवश्यक है कि सभ्य लोकतांत्रिक समाज में किसी भी व्यक्ति को फर्जी कहानी गढ़ कर कारागार में निरुद्ध कर देना सम्पूर्ण मानवता के साथ अपराध है और किसी भी आदमी को घर से पकड़ कर गोली मारकर हत्या कर देना और मुठभेड साबित करना भी सभ्य समाज के ऊपर तमाचा है ।
सुमन
loksangharsha.blogspot.com
Monday, October 12, 2009
लो क सं घ र्ष !: निंदक नियरे रखिये आँगन कुटी छवाये, बिन साबुन बिन तेल के निर्मल करे सुहाय
उत्तर प्रदेश की सरकार ने प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाना शुरू कर दिया है जो चिंता का विषय है । उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने ऊपर के अघोषित आदेशो के तहत उर्दू के सुप्रसद्दिध दैनिक अखबार जो लखनऊ व फैजाबाद से प्रकाशित होता है उसके विज्ञापन रोक दिए है और सरकार की कोशिश ये है की यह अखबार बंद हो जाए । इसका मुख्य कारण यह है कि सरकार के पक्ष के मौलाना साहब की कथनी और करनी में अन्तर के संबंध में उर्दू दैनिक ने संसदीय चुनाव से पहले से ही प्रकाशित करना शुरू कर दिया था । मौलाना साहब ने अपने सरकारी तालुकात का इस्तेमाल करते हुए ऊपर से आदेश करा दिए कि इस अखबार के विज्ञापन रोक दिए जाएँ और हर सम्भव तरीके से सरकार उर्दू दैनिक अखबार को बंद कराने की कोशिश कर रही है । इस तरह की परंपरा जन विरोधी होती है और हिटलरशाही की परंपरा बढती है अगर एक व्यक्ति की नाराजगी से मीडिया चलने लगेगा तो उसके परिणाम अच्छे नही आते है । जब-जब प्रिंट मीडिया के संपादको ने सरकार की जी हाँ हजूरी की है तो उस सरकार को जनता ने वापस कर दिया है । इस सम्बन्ध में रहीम का यह दोहा :-
"निंदक नियरे रखिये आँगन कुटी छवाय, बिन साबुन बिन तेल के निर्मल करे सुहाय" को लागू करना चाहिए तभी लोकतांत्रिक व्यवस्था बची और बनी रह सकती है । अच्छा होता की उत्तर प्रदेश की सरकार उक्त मौलाना साहब के क्रियाकलापों की जांच करा कर दण्डित करती ।
सुमन
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Sunday, October 11, 2009
लो क सं घ र्ष !: प्रधानमंत्री एक कारपोरेट हाउस की पैरवी में
यह शायद पहली बार हुआ है कि भारत के प्रधान मंत्री ने किसी कारपोरेट घराने को फायदा पहुँचने के लिए खुले आम उसके लिए पैरवी की हो। पर अब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एक ऐसी गलती मिसाल कायम कर दी है। वैसे तो चोरी-छिपे इस तरह की सिफ़ारिशें पहले भी चलती रही होंगी , जैसा कि मित्तल परिवार के ही लक्ष्मी मित्तल द्वारा आरसेलर नामक विदेशी कंपनी के अधिग्रहण के समय हुआ, पर खुले आम इस तरह की सिफारिश कर प्रधानमंत्री ने एक ग़लत परम्परा की नींव डाल दी है।
एक भारतीय कंपनी -भारती एयरटेल और दक्षिण अफ्रीकी कंपनी-एमटीएन के बीच खरबों रुपयों का गठबंधन सौदा पिछले कई दिनों से अटका पड़ा था । सम्भावना व्यक्त की जा रही थी की 30 सितम्बर तक यह मामला नही सुलझा तो सौदा ही कैंसल हो जाएगा। भारती एयरटेल भारत के एक सबसे बड़े कारपोरेट-घराने मित्तल घराने की कंपनी है।
प्रधानमंत्री जी-20 शिखर सम्मलेन की बैठक में भाग लेने अमेरिका के पिट्सबर्ग शहर गए थे। लगता है जी-20 बैठक के आलावा सुनील मित्तल की कंपनी- भरती एयरटेल का सौदा भी उनके पिट्सबर्ग एजेंडे में शामिल था। सम्मलेन के दौरान अफ्रीका के राष्ट्रपति जैक्जूमा के साथ उनकी कोई मीटिंग निर्धारित नही थी तो भी प्रधानमंत्री के दिमाग में एक भारतीय पूंजीपति घराने का हित इस कदर हावी था की उन्होंने राष्ट्रपति जूमा से मुलाकात की और उनसे कहा की वे चाहते है कि भारती एयरटेल और ऍमटीएन का सौदा हो जाए।
प्रधानमंत्री के सिपहसलार इस मीटिंग को चाहे कोई भी नाम दें, इसके बारे में कोई भी सफाई दे, पर व्यवहारतः यह भारती एयरटेल के लिए प्रधानमंत्री की सिफारिश ही थी। बेशक पूंजीपरस्त ताकतें प्रधानमंत्री की इस सिफारिश को राष्ट्रिय हित का काम बता रही है, पर प्रधानमंत्री ने एक कंपनी की पैरवी कर प्रधानमंत्री पद की गरिमा को नुकसान पहुँचाया है और एक नई परम्परा शुरू कर दी है।
देश के एक प्रमुख आर्थिक पत्र "इकनॉमिक टाईम्स" ने एक निजी डील के लिए प्रधानमंत्री की पैरवी का स्वागत किया है। पर उसे भी यह लिखना पड़ा है कि प्रधानमंत्री का यह कदम एक ऐसी मिसाल का काम कर सकता है जिसे बाद में पिछलग्गु पूँजीवाद के रूप में अध: पतन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। जाहिर है इकनॉमिक टाईम्स यह भुलाने कि कोशिश कर रहा है कि देश में क्रोनी केप्टलिज्म का दौर पहले ही चल रहा है।
इकनॉमिक टाईम्स का विचार है कि प्रधानमंत्री कि "त्रुटिहीन एवं अनिंध विश्वाशनियता एवं इमानदारी के चलते इस डील विशेष के लिए प्रधानमंत्री द्वारा पैरवी का कोई भी अन्य अर्थ नही निकलेगा सिवाय इसके की उन्होंने यह काम एक "सामूहिक हित" के लिए किया। पता नही इकनॉमिक टाईम्स को एक कारपोरेट घराने के व्यवसायिक फायदे में "सामूहिक हित" कहाँ नजर आ रहा है ? और थोडी देर के लिए यदि सामूहिक हित की बात को भी मान लिया जाए तो "त्रुटिहीन एवं अनिंध विश्वसनीयता " वाले प्रधानमंत्री के प्रशासकीय एवं राजनैतिक लाव लश्कर में - जो कारपोरेट घरानों के इस इस तरह के मामलो को प्रधानमंत्री के एजेंडे में शामिल करता है- व्यापक भ्रष्टाचार से कौन आँखें मूँद सकता है और कैसे माना जा सकता है की बात इस सामूहिक हित" तक ही सीमित है?
और अंत में क्या नतीजा निकला? इस सौदे को दक्षिण अफ्रीका की सरकार के अनुमोदन की जरूरत थी। प्रधानमंत्री की पैरवी के बावजूद दक्षिण अफ्रीका की सरकार ने इस सौदे का अनुमोदन नही किया और सौदा नही हो पाया। अब क्या इज्जत रह गई हमारे प्रधानमंत्री की ?
आर. एस. यादव
ए निगेटिव रक्त चाहिए....आपातकालीन स्थिति....
आपका रक्त किसी की जान बचा सकता है.....दिल्ली और नॉएडा के वे सभी सज्जन जिनका रक्त ग्रुप ए निगेटिव है...उनसे करबद्ध निवेदन है कि एक महिला को आपके रक्त की आवश्यक्ता है....नॉएडा के कैलाश अस्पताल में भर्ती महिला डेंगू से पीड़ित हैं...और इनकी हालत बेहद चिंताजनक है। इनको खून चढ़ाया जाना है जो कि ए निगेटिव ग्रुप का है.....और इस ग्रुप का रक्त न मिल पाने से इनकी हालत बिगड़ती जा रही है। ऐसे में समस्त ब्लॉगर साथियों से निवेदन है कि आगे आकर इस परिवार की मदद करें। रक्तदान के इच्छुक लोग रुचि गोयल से 9873521510, 99990051 मोबाइल नम्बरों पर सम्पर्क कर सकते हैं......
Friday, October 9, 2009
लो क सं घ र्ष !: अब क्या होगा ?
Tuesday, October 6, 2009
लो क सं घ र्ष !: जियरा अकुलाय
खबरि उनका देतिऊ पहुंचाय,
विकल तन मन जियरा अकुलाय।
तुम का जानौ मोरि बलमुआ मुनउक चढा बुखार,
घरी घरी पिया तुमहेंक पूंछैं फिरि अचेत होई जायं,
खबरि उनका देतिऊ पहुंचाय,
विकल तन मन जियरा अकुलाय।
किहें रहो तैं जिनते रिश्ता उई अतने सह्जोर ,
बिटिया कैंहा द्यउखै अइहैं पुनुवासी के भोर,
खबरि उनका देतिऊ पहुंचाय,
विकल तन मन जियरा अकुलाय।
चढा बुढापा अम्मा केरे बापू भे मजबूर,
खांसि खंखारि होति हैं बेदम गंठिया सेनी चूर,
खबरि उनका देतिऊ पहुंचाय,
विकल तन मन जियरा अकुलाय।
गिरा दौंगरा ई असाढ़ ख्यातन मां जुटे किसान ,
कौनि मददि अब कीसे मांगी घरमा चुका पिसान,
खबरि उनका देतिऊ पहुंचाय,
विकल तन मन जियरा अकुलाय।
काहे हमसे मुंह फेरे हो जाय बसेउ परदेश ,
साल बीत तुम घरे न आयेव धरेव फकीरी भेष,
खबरि उनका देतिऊ पहुंचाय,
विकल तन मन जियरा अकुलाय।
हँसी उडावे पास पड़ोसी रोजू दियैं उपदेश,
चोहल करैं सब मोरि कन्त कब अइहैं अपने देश ,
खबरि उनका देतिऊ पहुंचाय,
विकल तन मन जियरा अकुलाय।
डॉक्टर सुरेश प्रकाश शुक्ल
लखनऊ
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