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Thursday, August 9, 2012

प्रधानी की लूट


पंचायती राज में भारत के गाँव में ,
काली सी दाल पके पीपल के छाँव में !

नमक है किसका दाल है किसकी ,
मांगे हिसाब औकात है किसकी !

बिकता है मत मदिरा के अनुपात में ,
आरक्षण के कारण बाँट जात-२  में !

कुछ कर दे कर-२  कंगाल हो गए ,
कुछ गाँव के सरपंच के दलाल हो गए !

मूंछ वाला कोई तो कोई मुछ्मुंडा,
प्रधान का  दाहिना हाथ है गुंडा !

कैसे हो देश में  विकाश मूलभूत ,
गाँव में है मची प्रधानी की लूट !

-विनयतोष मिश्र
www.vinaytosh.blogspot.com 

1 comment:

काजल कुमार Kajal Kumar said...

वाह भई वि‍नयतोष जी अच्‍छा लि‍खा है

सुरक्षा अस्त्र

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