रंगकर्मी परिवार मे आपका स्वागत है। सदस्यता और राय के लिये हमें मेल करें- humrangkarmi@gmail.com

Website templates

Sunday, March 14, 2010

बेवफा बता बद दुआ देता है वो,और मैं उसके लिए मंदिर मंदिर धोक खाता रहा। -----बिन बुलाये वक्त बेवक्त चला आता था,अब तो मुड़कर भी ना देखा मैं आवाज लगाता रहा। ----एक सुरूर था दिलो दिमाग पर अपना है वो,देखा जो गैर के संग तो नशा उतर गया।

3 comments:

श्याम कोरी 'उदय' said...

एक सुरूर था दिलो दिमाग पर अपना है वो,
देखा जो गैर के संग तो नशा उतर गया।
.....bahut khoob !!!!

रचना दीक्षित said...

----एक सुरूर था दिलो दिमाग पर अपना है वो,देखा जो गैर के संग तो नशा उतर गया।

सही है जीवन का एक सच ये भी है

शरद कोकास said...

वाह ।

सुरक्षा अस्त्र

Text selection Lock by Hindi Blog Tips